लगता है कि बसपा की विरोधी पार्टी भाजपा या कांग्रेस नहीं ईवीएम है. क्यूंकि उन्होंने हमेशा की तरह इस बार भी उसको ही दोष देना शुरू कर दिया है. अबकी उन्होंने ट्वीट के माध्यम से कहा है कि -
सत्ताधारी बीजेपी को इस लोकसभा चुनाव में आमजनता द्वारा बुरी तरह से नकारे जाने का ही परिणाम है कि अब - बीजेपी वोट से नहीं बल्कि नोटों से
- ईवीएम की धांधली से
- पुलिस/प्रशासन तंत्र के दुरुपयोग सेे
- ईवीएम में चुनाव कर्मचारियों से ही बटन दबवाकर आदि धांधलियों से चुनाव जीतना चाहती है.
हमारा ये मानना है कि अगर आप जानते ही हैं (या अगर मानते भी हैं) कि ईवीएम के गड़बड़झाले से चुनाव जीते जा सकते हैं तो फिर आप चुनाव में इतने जी जान से क्यों लगे हुए हैं. गोया ये तो वही बात हो गयी कि चित भी मेरी, पट भी मेरी. चुनाव जीते तो खुद की पीठ थपथपा लो. हारे तो ईवीएम के ऊपर ठीकरा फोड़ दो. आपको पता ही होगा कि भारत के सबसे बड़े सूबे की मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती अबकी सपा, यानी अखिलेश यादव की पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही हैं.
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