इंदौर की एक महिला ने जिले के फैमिली कोर्ट में अपनी इकलौती बेटी के खिलाफ एक याचिका दायर की थी. आरोप कि बेटी ने उनकी सारी जमा-पूंजी ले ली. और, जब उनके सारे पैसे खत्म हो गए, तो उन्हें पीट कर घर से निकाल दिया. अब कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि पीड़ित महिला की बेटी को उन्हें भरण-पोषण के लिए हर महीने तीन हजार रुपये देने होंगे.
बेटी ने बूढ़ी मां की संपत्ति हड़पकर घर से निकाला, कोर्ट ने फटकारा कि देने होंगे इतने रूपये!
कोर्ट ने कहा कि जब बेटी माता-पिता की संपत्ति में अपना अधिकार रख सकती है, तो बेटी का दायित्व भी बनता है कि वो अपने परिजन का उनकी अंतिम सांस तक खयाल रखे.
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इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित महिला का नाम कौशल्या है. उम्र, 77 साल. पति रोडवेज बस में ड्राइवर थे. साल 2001 में उनकी मौत हो गई थी. बेटी राज कंवर उनकी इकलौती संतान है, जिनकी शादी 1984 में हो गई थी. पति के गुजर जाने और बेटी की शादी के बाद कौशल्या भिंड में अकेली रह रही थीं.
साल 2003 में बेटी-दामाद ने उनसे कहा कि भिंड में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं, इसीलिए घर बेचकर इंदौर चलें. कौशल्या के मुताबिक, उन्हें ये आश्वासन दिया गया था कि घर के पैसे उन्हीं के खाते में डाल देंगे. उनकी देखभाल भी करेंगे.
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बेटी-दामाद की बात पर भरोसा करके कौशल्या ने अपनी संपत्ति बेच दी. उनके साथ इंदौर आ गईं. पति की मौत के बाद प्रोविडेंट फंड (PF) का जो पैसा मिला था, बेटी के कहने पर धीरे-धीरे निकालती रही. जब मकान और PF के रुपए खत्म हो गए, तो कथित तौर पर बेटी राज कंवर का बर्ताव बदल गया. मां को ताने मारने लगी, घर का काम करवाने लगी.
कौशल्या की शिकायत के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान बेटी ने उन्हें पीटा और घर से बाहर निकाल दिया था. तब से वो बेटी से अलग रहने लगी. मार्च, 2021 में बेटी राज कंवर के खिलाफ भरण-पोषण देने का केस फैमिली कोर्ट में लगाया था.
महिला के वकील शैल राजपूत ने बताया कि कोर्ट ने सभी तर्क सुनने के बाद माना की बेटी मां का भरण-पोषण करने में सक्षम है, क्योंकि उसका पति ट्रांसपोर्टर है. कोर्ट ने कहा कि जब बेटी माता-पिता की संपत्ति में अपना अधिकार रख सकती है, तो बेटी का दायित्व भी बनता है कि वो अपने परिजन का उनकी अंतिम सांस तक खयाल रखे. कोर्ट ने बेटी को आदेश दिए हैं कि हर महीने अपनी मां को भरण-पोषण के लिए 3000 रुपये देने होंगे.
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