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बवाल के बाद बदली गई रामायण एक्सप्रेस के वेटर्स की ड्रेस अब कैसी है?

इससे पहले इन वेटर्स की ड्रेस पारंपरिक और भगवा रंग की थी.

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रामायण एक्सप्रेस के दो कर्मचारी पुरानी ड्रेस में. (तस्वीर- पीटीआई)
रामायण एक्सप्रेस. धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इसी महीने शुरू की गई. ट्रेन की धार्मिक यात्रा शुरू हुए ज्यादा दिन नहीं हुए कि ये विवादों में घिर गई. विवाद का कारण है ट्रेन के वेटर्स की वेशभूषा. दरअसल ट्रेन में काम कर रहे वेटर्स की ड्रेस भगवा रंग की थी. ये बात संतों को रास नहीं आई. उन्होंने वेटर्स की ड्रेस भगवा होने पर कड़ी आपत्ति जता दी. यहां तक कि ट्रेन रोकने तक की धमकी दे दी गई. इसके चलते रामायण एक्सप्रेस के वेटर्स का ड्रेस कोड बदल दिया गया है. इसकी तस्वीर भी सामने आई है.
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विरोध के चलते बदली गई रामायण एक्सप्रेस के वेटर्स की ड्रेस. (तस्वीर- इंडिया टुडे)

ट्रेन रोकने की धमकी दी थी

हिन्दुस्तान टाइम्स की ख़बर के अनुसार संतों ने कहा था कि अगर रामायाण एक्सप्रेस के वेटर्स का ड्रेस कोड नहीं बदला गया तो वे इसके विरोध में ट्रेन ही रोके देंगे. अखबार के मुताबिक संतों ने कहा कि ये ड्रेस हिंदू धर्म का अपमान है जिसे तुरंत रोका जाना चाहिए.
समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उज्जैन अखाड़ा परिषद के पूर्व महासचिव अवधेश पुरी ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री को पत्र लिखकर ये मांग की है कि अगर ये ड्रेस कोड वापस नहीं लिया गया तो साधु-संत 12 दिसंबर को दिल्ली में ये ट्रेन रोकेंगे. अवधेश पुरी ने कहा था
“हमने दो दिन पहले रेल मंत्री को पत्र लिखकर रामायण एक्सप्रेस में भगवा रंग में भोजन परोसने वाले वेटर्स के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया है. साधु जैसी टोपी के साथ भगवा पोशाक पहनना और रुद्राक्ष की माला (हार) पहनना हिंदू धर्म और उसके संतों का अपमान है.”

लोगों ने क्या कहा?

भगवा ड्रेस कोड पर उज्जैन अखाड़ा परिषद से लेकर आम लोग भी नाराज दिखे. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें रामायण एक्सप्रेस ट्रेन के वेटर्स भगवा रंग की ड्रेस में दिखाई दिए. इस पर विवाद खड़ा हो गया. कुछ लोगों ने इसे हिंदू धर्म का अपमान बताया. अनिल तिवारी नाम के शख्स ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा,
रामायण एक्सप्रेस ट्रेन में रेस्टोरेंट में इस तरह से हिंदू संतों का अपमान न किया जाए. हिंदू संत की वेशभूषा में लोगों का जूठन उठाना बंद किया जाए. वैसे उम्मीद नहीं है कि कोई ब्राह्मण नेता मुंह खोलेगा, पर ये उनके लिए भी टेस्ट है. कुर्सी के लिए इतना तो ना गिरो.
गुंजेश गौतम झा नाम के एक यूजर ने लिखा,
"हिंदू भावनाओं की ठगी, विक्षिप्तता और मूर्खता का इससे बड़ा उदाहरण कोई और नहीं हो सकता. अयोध्या रामेश्वरम रामायण सर्किल एक्सप्रेस के रेस्टोरेंट में वेटर अब साधु-संत की वेशभूषा पहन यात्रियों के जूठन समेटेंगे. रेल मंत्री जी ये संतों की वेशभूषा का अपमान है. अतिशीघ्र बदलाव कीजिए."

 


वहीं शूजा गांधी नाम के एक यूज़र ने कहा,
रामायण एक्सप्रेस ट्रेन की पहली यात्रा पर प्रसारित तस्वीरें और वीडियो घृणित और अस्वीकार्य हैं. हमारी भावनाओं को आहत करना, भगवा साधु संत के ड्रेस कोड में वेटर्स को देखना दर्दनाक है. इसे हटाना होगा.

क्या कहा रेलवे ने?

इंडिया टुडे के मोहित शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेन के वेटर्स के ड्रेस कोड के खिलाफ विरोध बढ़ता देख रेलवे को इसमें बदलाव करना पड़ा है. इस पूरे मामले पर रेलवे की ओर से कहा गया है,
"रामायण यात्रा एक्सप्रेस के सर्विस स्टाफ की ड्रेस को पूरी तरह से बदल दिया गया है. अब सर्विस स्टाफ प्रोफेशनल कपड़ों में दिखेगा. असुविधा के लिए खेद है."

भगवान राम से जुड़ी जगहें घुमाती है रामायण एक्सप्रेस

रामायण एक्सप्रेस लोगों को भगवान राम से जुड़ी जगहों पर घुमाने के लिए शुरू की गई है. ये ट्रेन दिल्ली के सफदरजंग रेलवे स्टेशन से चलती है, और अयोध्या जाती है. वहां से ये लोगों को नंदीग्राम, जनकपुर, सीतामढ़ी होते हुए नेपाल ले जाती है. इसके बाद वापस ट्रेन से यात्रियों को काशी ले जाया जाता है. यहां से बसों के जरिए काशी के प्रसिद्ध जगहें घुमाने के बाद श्रृंगवेरपुर और चित्रकूट ले जाया जाता है.

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