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17 साल से रेत और पत्थर खाकर जिंदा है रामेश्वर

बता रहे हैं कोई बीमारी थी. तो बैद जी यही इलाज बताए थे.

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फोटो - thelallantop
चुप चुपके पिच्चर याद है? उसमें 'मजबूत और टिकाऊ' रोटी पाकर राजपाल यादव कहते हैं कि एक आरी दे दो काटने के लिए. ये रामेश्वर राजपाल से चार हाथ आगे हैं. पत्थर लील जाते हैं. बिना आरी से काटे. रामेश्वर हरिद्वार के रहने वाले हैं. बताते हैं कि वो पिछले 17 साल से रेत और पत्थर खा रहे हैं. कहते हैं कोई बीमारी हो गई थी. बैद जी ने इलाज यही बताया. तब से इसी डिश पर जिंदा हैं. हम पक्का नहीं कह सकते कि ये सही है कि नहीं. लेकिन वीडियो में तो दिख रहा है. साथ में मिनरल वॉटर भी गटक रहे हैं. आप तो सीधे वीडियो देखो. https://www.youtube.com/watch?v=NAXyQiUgaaE

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