इंडियन एक्सप्रेस ने एक HDFC बैंककर्मी के हवाले से छापा है, 'पहले हमें महीने में ऐसी 5 हजार मशीनों की रिक्वेस्ट मिलती थी. लेकिन कुछ दिनों से हर रोज 5 हजार मशीनों की डिमांड आ रही है.' एक्सिस बैंक के एक कर्मचारी ने अखबार को बताया कि उनके पास POS मशीनों की तीन गुना डिमांड आ रही है. ICICI बैंक ने डिमांड में बढ़ोतरी के आंकड़े नहीं बताए, लेकिन ये जरूर कहा, 'पिछले कुछ दिनों में हमारे आउटलेट्स पर पेमेंट वाली मशीनों की डिमांड बहुत तेजी से बढ़ी है. रोज की डिमांड इससे पहले हफ्ते भर में आने वाली औसत डिमांड से भी ज्यादा है.'इन मशीनों को कार्ड स्वाइप मशीनें या पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें कहते हैं. शहरी और अर्धशहरी इलाकों के कई इलाकों में इनकी डिमांड कई गुना बढ़ गई है. छोटे कारोबारी भी मंगवा रहे हैं ताकि तकनीकी तौर पर सक्षम कंपटीटर्स के आगे उनका बिजनेस ना बूड़ जाए.
सितंबर 2012 में भारत में 7.41 लाख POS मशीनें थीं. जबकि सितंबर 2016 तक इनकी संख्या 14.96 लाख हो गई थी. बैंक वालों का कहना है कि इन मशीनों की संख्या अब महानगरों के अलावा, दूसरी श्रेणी के शहरों में भी तेजी से बढ़ रही है. POS मशीनों की संख्या में बढ़ोतरीबैंक के प्रवक्ता ने बताया कि इस मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त लोगों को काम पर लगाया गया है. तीनों बैंकों ने बताया कि इन मशीनों की डिमांड नई कैटेगरी के व्यापारियों की तरफ से आ रही हैं, जिनमें ब्यूटी सैलन, छोटी किराना दुकानें और सब्जी बेचने वाले भी शामिल हैं.
बैंकिंग के जानकार मानते हैं कि POS मशीनों की मांग बढ़ने को अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा कहा जा सकता है. अगर ज्यादा से ज्यादा लोग कैश के बजाय, कार्ड से पेमेंट करने लगें तो यह आदत में शुमार हो सकता है. एक बैंकर ने कहा, 'पहले ज्यादातर व्यापारी खुद कार्ड से पेमेंट करने को पसंद नहीं करते थे. अब वे खुद मशीनों की मांग कर रहे हैं. इससे ई-ट्रांजेक्शन बढ़ेंगे जो कि अच्छी बात है.' ये भी पढ़ें तीन दिन से घर नहीं गया था बैंक मैनेजर, हार्ट अटैक से मौत पुरानी नोटों से फैल रही नई बीमारियां, बैंककर्मी परेशान क्या प्रधानमंत्री का रोना लोगों की चीखों पर भारी पड़ गया है?

















.webp?width=120)



