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दिल्ली दंगों की जांच में घपला कर रही पुलिस? कोर्ट ने 'फर्जी' बयान पर रगड़ दिया, आरोपी रिहा

इस महीने दूसरी बार है जब कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को 'फर्जी सबूतों' के लिए सुनाया है.

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कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ "मनगढ़ंत बयान" दर्ज किये थे (फाइल फोटो- PTI)

साल 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में एक मुस्लिम व्यक्ति को रिहा करते हुए दिल्ली कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने उसके खिलाफ "मनगढ़ंत बयान" दर्ज किये थे. कोर्ट ने जावेद नाम के व्यक्ति को सभी आरोपों से बरी कर दिया. उनके खिलाफ गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने, हिंसा करने और तोड़फोड़ करने के आरोप लगे थे. कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशंस जज पुलास्त्य प्रमाचला ने कहा कि पुलिस ने जावेद के खिलाफ घटना की सही तरीके से जांच किए बिना फर्जी तरीके से चार्जशीट फाइल कर दी.

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जावेद के खिलाफ पिछले साल 26 फरवरी को आरोप तय किये गए थे. कोर्ट ने फर्जी बयान के लिए जांच अधिकारी और दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल की आलोचना की. जज ने जावेद को रिहा करते हुए कहा, 

"पिछली सुनवाई और टिप्पणियों के आधार पर मैं इस नतीजे पर पहुंचा हूं कि पुलिस ने दंगे और तोड़फोड़ की घटना को साबित किया, लेकिन इन घटनाओं में वो आरोपी की मौजूदगी को साबित करने में विफल रही."

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जज ने इन घटनाओं की जांच सही तरीके से किये बिना खुद से चार्जशीट फाइल करने को लेकर दिल्ली पुलिस को फटकार भी लगाई. दरअसल, इस महीने ये दूसरी बार है जब दिल्ली पुलिस पर इस तरह का आरोप लगा है. 16 अगस्त को कड़कड़डूमा कोर्ट ने ही दंगे से जुड़े एक दूसरे मामले में पुलिस पर "मनगढ़ंत सबूत" देने का आरोप लगाया था. कोर्ट ने उस मामले में तीन लोगों को रिहा कर दिया था.

जावेद के खिलाफ मामला दयालपुर इलाके में हुई हिंसा के कारण दर्ज हुआ था. उस हिंसा में कई लोग घायल हुए थे और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था. मामले में चार अलग-अलग शिकायतें दर्ज हुई थीं, लेकिन बाद में पुलिस ने सबको इकट्ठा एक जगह कर दिया था. ये मामला 25 फरवरी 2020 से जुड़ा हुआ था, जब दयालपुर पुलिस स्टेशन को जानकारी मिली थी कि आरपी पब्लिक स्कूल के पास दंगे हो रहे हैं. जावेद को 14 अप्रैल 2020 को उनके घर से गिरफ्तार किया गया था.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने बताया कि जांच अधिकारी और कॉन्स्टेबल ने जावेद की गिरफ्तारी को लेकर विरोधाभासी बातें कही हैं. कोर्ट के मुताबिक, जो IPC की धारा-436 (आग या विस्फोट के जरिये नुकसान) लगाई गई है, उसे साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं हैं और ऐसी धारा स्थिति को सही से जांचे बिना लगा दी गई.

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फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में दंगे हुए थे. इस हिंसा में कम से कम 53 लोगों की मौत हुई थी. कई लोग घायल हुए थे. बड़ी संख्या में सरकारी और निजी प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचा था. सरकारी बसों और घरों में तोड़फोड़ की गई थी. दंगों से जुड़े अलग-अलग मामलों में दो हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया था.

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