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कानून इजाजत दे तो रेपिस्ट को मौके पर ही मार दें: बस्सी

दिल्ली पुलिस की कोशिश थी कि वो सारी FIR लिखें, 20 रुपए और तीन बकरियों की FIR भी लिख डाली.

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फोटो - thelallantop
सोमवार को दिल्ली पुलिस की सालाना प्रेस कांफ्रेंस हुई, ऐसी प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस साल भर का हिसाब-किताब और आगे के प्लान बताती है. दिल्ली पुलिस की ओर से बोल रहे थे दिल्ली के कमिश्नर बी.एस. बस्सी. वीमेन सेफ्टी पर भी बतियाए और दिल्ली सरकार पर भी निशाना कसा.  उनने जो कहा उसका लब्बोलुआब ये रहा.
"जघन्य अपराधों में कमी आई है, बावजूद इसके हमने ज्यादा FIR दर्ज की हैं. हमारी कोशिश थी कि पुलिस ईमानदारी से सारी FIR लिखें, और इसी ईमानदारी के फेर में पुलिस ने चोरी गए 20 रुपए और तीन बकरियों की FIR भी लिख डाली."

दिल्ली में क्राइम तो बढ़े हैं, पर बढ़ने का रेट घट गया है. यानी पहले के मुकाबले कम हो गए हैं शहर में अपराध.

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"दिल्ली वाले लकी हैं कि दिल्ली पुलिस दिल्ली सरकार के अंडर नहीं आती. हम सरकार से कोई उम्मीद नहीं रखते और ड्रामेबाजी की परवाह नहीं करते."

"संविधान किसी दिन रेपिस्ट को मौके पर गोली मारने की इजाजत दे तो हम हिचकेंगे नहीं."

"ये जुवेनाइल 16-18 की उम्र के थे. 'जुवेनाइल' की उम्र घटाना बहुत जरूरी हो गया है."

"औरतों की सेफ्टी हमारे लिए सबसे इम्पॉर्टेन्ट है. घरेलू हिंसा और औरतों से मार-पीट हर देश में होती है. लेकिन हम घड़ियाली आंसू नहीं बहाते बल्कि औरतों  की सेफ्टी के लिए काम करते हैं. नए अफसर खुद औरतों की सुरक्षा के मामलों को प्राथमिकता दें ."
"चोरी की 80% घटनाओं में जांच पूरी नहीं हो पाई. ऐसे केसेज में पुलिसवाले झूठ बोल दिया करते थे. अब सच बताया जाता है ध्यान देंगे कि पुलिस वाले झूठ न बोलें और जो जैसा है, वैसा ही जनता को बताएं."
"हमने डिजिटल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जिससे हमारा समय बचा और हम दूसरे जरूरी काम कर सके."

वाहनों की चोरी दिल्ली के अपराधियों का फेवरेट है. शहर में हुए टोटल अपराधों में एक-तिहाई से भी ज्यादा वाहनों के चोरी के हैं. और दिल्ली पुलिस इनमें से सिर्फ 4% को सॉल्व करने में सफल रही है. मतलब 10 में से 6 चोर चौड़ में घूमते हैं. चेकिंग के वक़्त रोको तो बदमाश ट्रैफिक पुलिस से मारपीट पर उतर आते हैं. ट्रैफिक पुलिस को भी पिस्तौल देने की बात कही. साल 2015 में 2000 से भी ज्यादा आरोपी नाबालिग थे. इनमें से 440 अपराधी थे, और 100 से ज्यादा ने मर्डर, एटेम्पट टू मर्डर और रेप किया है. शहर में हर चार घंटे पर एक रेप और हर दो घंटे पर एक मोलेस्टेशन की घटना होती है. साल 2015 में साल 2014 से कम केस सॉल्व हुए. मतलब पुलिस की परफॉरमेंस गिर गई. दिल्ली हमेशा आतंकियों के निशाने पर रहती है, पुलिस को आतंकियों के बारे में इनपुट मिले हैं. पर दिल्ली पुलिस ये इनपुट किसी से कभी शेयर नहीं करेगी क्योंकि ये इंफॉर्मेशन सीक्रेट होते हैं.  

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