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PM मोदी को चुनाव लड़ने से रोकना चाहता था, हाई कोर्ट ने इलाज की व्यवस्था कर दी

कैप्टन दीपक कुमार ने लोकसभा चुनाव से पहले PM मोदी को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग की थी. इस याचिका को Delhi High Court के सिंगल जज ने पहले ही खारिज कर दिया था. फिर दीपक कुमार ने सिंगल जज के इस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की. अब उस पर भी फैसला आ गया है.

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PM Modi को लोकसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका कैप्टन दीपक कुमार ने दायर की थी. (फाइल फोटो: PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ याचिका दायर करने वाले एक व्यक्ति को दिल्ली हाई कोर्ट ने खूब सुनाया है. कहा है कि इस व्यक्ति को मेडिकल हेल्प की जरूरत है. कोर्ट ने मेंटल हेल्थकेयर एक्ट के प्रावधानों के तहत स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया है याचिकाकर्ता पर नज़र रखी जाए. इस व्यक्ति ने PM Modi को लोकसभा चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी. उसकी ये याचिका दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज ने पहले ही खारिज कर दी थी. फिर इस व्यक्ति ने सिंगल जज के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की. लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक उसकी ये याचिका भी 3 जुलाई को एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस तुषार राव गेडेला की डिविजन बेंच ने खारिज कर दी.  

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PM मोदी पर क्या आरोप लगाए गए थे?

PM मोदी को लोकसभा चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिका कैप्टन दीपक कुमार ने दायर की थी. उनका आरोप था कि पीएम मोदी और उनके साथियों ने साल 2018 में एयर इंडिया के एक विमान (जिसमें दीपक पायलट थे) की दुर्घटना की प्लानिंग कर राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने का प्रयास किया था. दीपक कुमार ने कहा था कि PM मोदी अपने प्रधानमंत्री पद का 'दुरुपयोग' कर रहे हैं.

उनकी याचिका में कहा गया था,

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“2024 के आम चुनावों के लिए वाराणसी से उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने रिटर्निंग अधिकारी के सामने भारत के संविधान के प्रति आस्था और निष्ठा रखने की झूठी शपथ प्रस्तुत की थी.”

याचिका में अमित शाह और ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी उम्मीदवारी रद्द करने की मांग की गई थी.

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दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या कहा?

हाई कोर्ट की बेंच ने 3 जुलाई को दीपक कुमार से कहा कि वो अपनी याचिका में कहीं से कहीं जा रहे हैं. बेंच ने कहा,

"आप ठीक तो हैं? आप कह रहे हैं कि उन्होंने झूठी शपथ ली है, आपके प्लेन पर हमला हुआ, आपकी बेटी गायब हुई और कोई पूर्व CJI आपको मारने की कोशिश कर रहा है. कोई भी इंसान आपकी याचिका को नहीं समझ सकता. इसका कोई मतलब नहीं है. सिंगल जज का ये कहना बिल्कुल सही था कि आपकी याचिका में निराधार आरोप लगाए गए हैं."

कोर्ट ने पाया कि दीपक कुमार के आरोप उनकी कल्पना मात्र हैं और उनमें कोई ठोस तथ्य नहीं है. सिंगल जज के आदेश को बरकरार रखते हुए डिविजन बेंच ने कहा कि अगर दीपक कुमार को भ्रम नहीं हो रहा है, तो उन्हें मेडिकल हेल्प की जरूरत है. हालांकि, जब कुमार ने कहा कि वो स्वस्थ हैं और उन्हें किसी मेडिकल हेल्प की जरूरत नहीं है, तो बेंच ने आदेश दिया,

"मेंटल हेल्थकेयर एक्ट के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए, ये अदालत स्थानीय SHO, SDM और जिला न्यायाधीश को अपीलकर्ता पर नजर रखने का निर्देश देती है."

इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट के सिंगल जज ने भी 30 मई को दीपक कुमार की याचिका खारिज कर दी थी. उन्होंने कहा था कि याचिका में निराधार आरोप लगाए हैं, जिसका मकसद सिर्फ सनसनी फैलाना है.

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