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सभी का 'जहर' मिला है यमुना में, इसके पानी में किसी एक का मिलाया जहर थोड़ी है!

एक रिपोर्ट में नहीं, अलग-अलग लैब टेस्ट्स और रिपोर्ट्स में सामने आया है कि यमुना के पानी में गंभीर रूप से बीमार करने वाले और जानलेवा पदार्थ मौजूद हैं.

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दिल्ली के कालिंदी कुंज घाट की तस्वीर. तारीख- 10 जनवरी, 2025. (क्रेडिट- PTI)

दिल्ली चुनाव आए तो अरविंद केजरीवाल को भी यमुना नदी की याद आ गई. उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा से जो यमुना का पानी दिल्ली की तरफ आ रहा है उसमें जहर मिला हुआ है. बदले में हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने कथित तौर पर यमुना का पानी पीते हुए वीडियो भेज दिया. दोनों नेताओं की राजनीति से काम नहीं चला तो चुनाव आयोग भी यमुना में 'डुबकी' लगाने आ गया. तीनों को बढ़िया फुटेज मिल रहा है. एक-दूसरे को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा. अच्छा चुनाव प्रचार चल रहा है. पर काश इस रस्साकशी से यमुना का पानी भी साफ हो जाता. अफसोस कि ये मुमकिन नहीं है. क्योंकि अब आगे जो यमुना नदी से संबंधित तथ्य और आंकड़े आप देखेंगे उसके बाद अफसोस के सिवा कुछ किया भी नहीं जा सकता.

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यमुना का पानी पीने और नहाने के लायक भी नहीं!

7 नवंबर, 2024 को इंडिया टुडे ने यमुना नदी के पानी को लैब में टेस्ट कराया और एक रिपोर्ट छापी. यमुना से लिए गए पानी के सैंपल्स को 16 अलग-अलग मानकों पर जांचा गया, जिनमें pH लेवल, टोटल अल्काइनिटी, हार्डनेस और बैक्टीरिया की मौजूदगी पाई गई. इस रिपोर्ट का सार कुछ इस प्रकार है.

- डिज़ॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO): पानी में DO का सही स्तर 5 या उससे ऊपर होना चाहिए, लेकिन यमुना के सभी सैंपल्स इस सीमा से नीचे मिले.

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- बैक्टीरिया की मात्रा: WHO के अनुसार, पानी में बैक्टीरिया की मात्रा 100 CFU से कम होनी चाहिए, लेकिन यमुना में यह बेहद खतरनाक स्तर पर थी.

- अमोनिया: 1 से अधिक स्तर यमुना के पानी में खतरनाक अम्लीयता दर्शाता है.

- फॉस्फेट: इसका उच्च स्तर पानी में झाग (फ्रॉथ) बनने का कारण बनता है, जिससे प्रदूषण के संकेत मिलते हैं.

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ये सिर्फ एक रिपोर्ट थी. जिसने बताया कि यमुना के पानी में ऑक्सीजन की कमी है, बैक्टीरिया ज्यादा हैं. अमोनिया और फॉस्फेट जैसे केमिकल्स भी हैं. अब एक दूसरी रिपोर्ट पर नज़र डालते हैं जिससे पता चलेगा कि दिल्ली के निवासी जिस पानी को पी रहे हैं, खाना पका रहे हैं, घरों में इस्तेमाल कर रहे हैं, सब्जियां उगा रहे हैं उनमें कौन-कौन से केमिक्ल्स मौजूद हैं. 

पर्यावरण संबंधी रिपोर्ट्स के लिए जानी जाने वाली AQI वेबसाइट ने 6 नवंबर, 2024 को यमुना नदी पर एक रिपोर्ट छापी थी. इसके मुताबिक इस नदी को ज़हर बनाने वाले 4 बड़े प्रदूषक हैं, जो हम इंसानों के लिए बेहद घातक हैं.

1. अमोनिया: दिल्ली के औद्योगिक कचरे और सीवेज के कारण पानी में अमोनिया की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है. ज्यादा अमोनिया से त्वचा पर जलन, आंखों को नुकसान और सांस की बीमारियां हो सकती हैं.

2. फॉस्फेट और नाइट्रेट्स: घरों से निकलने वाले डिटर्जेंट और गंदे पानी में मौजूद ये केमिकल नदी के इकोसिस्टम को बर्बाद कर देते हैं और इससे यमुना में झाग का ढेर बनता है.

3. हेवी मेटल्स: दिल्ली के उद्योगों से लेड, मरकरी जैसे जहरीले धातु तत्व सीधे नदी में मिलते हैं, जो न केवल पानी में रहने वाले जीवों के लिए, बल्कि इंसानों के लिए भी बेहद खतरनाक हैं.

4. बैक्टीरिया और जैविक कचरा: दिल्ली का अनट्रीटेड सीवेज सीधे यमुना में गिरता है, जिससे E. Coli जैसे बैक्टीरिया खतरनाक स्तर तक पहुंच जाते हैं. यह चर्म रोग, पेट के संक्रमण और अन्य बीमारियों को जन्म दे सकता है.

ये सारे केमिकल्स, मेटल्स और बैक्टीरिया दिल्ली में बह रही यमुना नदी में मौजूद हैं जिसे दिल्ली की लाइफलाइन कहा जाता है. और ये किसी एक रिपोर्ट में नहीं, अलग-अलग लैब टेस्ट्स और रिपोर्ट्स में सामने आया है कि यमुना के पानी में गंभीर रूप से बीमार करने वाले और जानलेवा पदार्थ मौजूद हैं. और इन पदार्थों पर थोड़ा सा गौर फरमाएंगे तो हम ये बड़ी ही आसानी से समझ सकते हैं कि यमुना में इनकी मौजूदगी के कारण क्या हैं.

एक बार हम यमुना नदी के प्रदूषण के कारणों पर भी नज़र डालते हैं ताकि ये समझा जा सके कि दिल्ली पहुंचने वाले यमुना के पानी में जहर मिला हुआ है या दिल्ली खुद जहर मिला रही है.

यमुना को जहरीला बनाने वाली 4 बड़ी वजहें

1. सीवेज पानी: दिल्ली के गंदे नाले बिना साफ किए सीधे यमुना में मिलते हैं. AQI की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के सिर्फ 35% सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स तय मानकों पर खरे उतरते हैं, बाकी तो सीधे नदी को ‘गटर’ बना रहे हैं. PTI की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल दिसंबर में फीकल कॉलीफॉर्म बैक्टीरिया (जो सीवेज से आता है) 79 लाख यूनिट प्रति 100ml तक पहुंच गया था. जबकि इसकी अधिकतम सीमा 2,500 यूनिट/100 ml होनी चाहिए. अक्टूबर 2024 में भी यही सामने आया था, जो 2020 के बाद सबसे अधिक था. रिपोर्ट के मुताबिक 2020 में यह संख्या 120 करोड़ यूनिट/100 ml थी, जो अब तक का सबसे भयावह रिकॉर्ड है. यानी यमुना नदी के पानी में मानव मल से बने बैक्टीरिया तैर रहे हैं. बस हम नंगी आंखों से उन्हें देख नहीं सकते.

2. कूड़ा-कचरा: घरेलू कूड़ा और नगर निगम की गंदगी भी बिना फिल्टर किए यमुना में डाली जाती है, जिससे नदी की हालत बद से बदतर हो रही है.

3. मिट्टी का कटाव: औद्योगीकरण और अतिक्रमण के चलते यमुना के किनारों से पेड़ काट दिए गए हैं. मिट्टी नदी में बहती है, जिससे पानी की शुद्धिकरण क्षमता खत्म हो जाती है और गाद जमने से पानी और ज्यादा खराब होता है.

4. रासायनिक प्रदूषण: उद्योगों और खेतों से निकलने वाले फर्टिलाइजर, कीटनाशक और अन्य हानिकारक रसायन यमुना में बहा दिए जाते हैं, जिससे पानी में झाग और प्रदूषण बढ़ता जा रहा है.

यानी हरियाणा वाले यमुना में जहर मिला रहे हैं या नहीं ये तो जांच का विषय है, लेकिन दिल्ली वाले जरूर ऐसा कर रहे हैं. और सीवेज़ ट्रीटमेंट के आंकड़े ये बताने के लिए काफी हैं पिछले 10 सालों में यमुना को साफ करने के दावे कितने खोखले हैं.

वीडियो: यमुना नदी पर नायब सिंह सैनी ने केजरीवाल को घेरा, बात मानहानि तक पहुंची

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