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2015 और इस बार के दिल्ली विधानसभा चुनाव में क्या अंतर है?

चुनाव के नतीजे 11 फरवरी को आएंगे.

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. इनकी पार्टी AAP ने पहली बार 2013 में चुनाव लड़ा था.

चुनाव आयोग ने दिल्ली विधनसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है. चीफ चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तारीखों की घोषणा की. दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों पर एक चरण में ही वोटिंग होगी. 8 फरवरी को दिल्ली में वोटिंग होगी. इस दिन शनिवार है. वोटों की गणना 11 फरवरी को होगी. इस दिन मंगलवार है.

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नोटिफिकेशन 14 जनवरी को जारी होगा. नामांकन की आखिरी तारीख 21 जनवरी है. नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख 24 जनवरी है.

इसी के साथ ही दिल्ली में आचार संहिता लागू हो गई है. इस बार 1 करोड़ 46 लाख लोग वोटिंग में हिस्सा लेंगे. इनमें पुरुष वोटर्स की संख्या 80 लाख है और महिला वोटर्स की संख्या 66 लाख है. वहीं थर्ड जेंडर वोटर्स की संख्या 815 है. 13,750 पोलिंग बूथ बनाए जाएंगे.

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2015 में क्या हुआ था? 2015 में 7 फरवरी के दिन वोटिंग हुई थी. नतीजे 10 फरवरी को आए थे. इस बार दोनों मामलों में एक-एक तारीख आगे खिसका दी गई है.

पिछली बार चुनाव 2015 में हुए थे. आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों पर चुनाव लड़ा था, इनमें से 67 सीटों पर जीत हासिल की थी. बीजेपी ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी. आप को 48 लाख से ज्यादा वोट मिले थे. वोट परसेंट 54.34% था. बीजेपी को 28 लाख वोट मिले थे. वोट परसेंट 32.19% था.

2013 में क्या हुआ था?

इसके पहले 2013 में विधानसभा चुनाव हुए थे. AAP ने 28 सीटें जीती थीं. बीजेपी के पाले में 31 सीटें आई थीं. कांग्रेस ने 8 सीटें जीती थीं. इसके अलावा JDU और शिरोमणी अकाली दल ने 1-1 सीट जीती थीं. 1 सीट पर निर्दलीय ने कब्जा किया था.

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