मौसम विभाग का अनुमान है कि 27 नवंबर को दिल्ली में बारिश (Delhi Rain AQI) होने वाली है. दूसरी तरफ पराली जलाने के मामलों (Farm Fires) में भी काफी कमी देखने को मिली है. खबरें हैं कि पंजाब में गेंहू की 90 फीसदी बुआई पूरी हो गई है. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि दिल्ली-NCR के लोगों को वायु प्रदूषण से राहत मिलेगी. हालांकि, एक स्टडी ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है.
पराली जलना बंद, बारिश का अनुमान, लेकिन ये खबर दिल्ली-NCR वालों को परेशान कर देगी!
एक रिपोर्ट में पता चला है कि नवंबर महीने में दिल्ली के वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा सोर्स ट्रांसपोर्ट सेक्टर रहा. सितंबर में भी कुछ ऐसा ही था.


इस स्टडी में कहा गया है कि नवंबर महीने में दिल्ली के वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा सोर्स ट्रांसपोर्ट सेक्टर रहा. Real-Time Source Apportionment की इस स्टडी में IIT कानपुर, IIT दिल्ली और TERI (The Energy and Resources Institute) भी शामिल है.
राउज एवेन्यू के पास एक सुपरसाइट पर 9 से 25 नवंबर तक की गई स्टडी में पता चला कि PM2.5 लेवल में सबसे ज्यादा योगदान ट्रांसपोर्ट सेक्टर और सेकेंडरी एरोसोल का रहा. इनकी हिस्सेदारी लगभग 61 फीसदी मिली. वहीं बायोमास जलाने से 27 फीसदी का योगदान हुआ.
स्टडी में ये भी पता चला है कि 1 से 4 सितंबर तक मिट्टी और धूल की प्रदूषण में हिस्सेदारी 30 फीसदी थी. हालांकि, नवंबर में आते आते ये भी बेहद कम हो गई. 21-22 नवबंर को महज 1 फीसदी हिस्सेदारी थी.
सेकेंडरी एरोसोल क्या है?सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट CSE में रिसर्च एंड एडवोकेसी की कार्यकारी निदेशक अनुमिता रॉयचौधरी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सेकेंडरी एयरोसोल नाइट्रोजन के ऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड जैसी गैसों से मिलकर बनते हैं. ये गैसें वाहनों या इंडस्ट्रीज से निकलती हैं. उन्होंने बताया कि धूल पर कंट्रोल करने से मदद नहीं मिलेगी, इसलिए हमें वाहनों, उद्योगों और पॉवर प्लांट्स से निकलने वाली इन गैसों पर ध्यान देना होगा.
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आंकड़ों से पता चलता है कि सितंबर के दौरान भी वाहन और सेकेंडरी एरोसोल ही प्रदूषण के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार रहे. सितंबर में वाहनों का औसत प्रतिशत योगदान लगभग 35.66% था जबकि सेकेंडरी एरोसोल का योगदान 36% था.
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