याकूब मेमन को फांसी देने पर हुआ बवाल याद है. विरोधी, समर्थक सब आपस में भिड़ लिए थे. अपना मुल्क बौद्धिक जुगाली करता हुआ दो हिस्सा में बंट गया था. लेकिन जिस पाकिस्तान के लिए हम 'आतंक का आका' टाइप हेडलाइन देते हैं. वो 'बेचारा' खुद आतंकवाद, क्रिमिनल्स से परेशान है. दिसंबर 2014 में पेशावर के आर्मी पब्लिक स्कूल में 132 मासूम बच्चों की जान चली गई थी. तब से लेकर अब तक पाकिस्तान के एंटी आतंकी रवैये में बड़ा चेंज आया है. पेशावर अटैक के बाद रूल्स बदले गए. यूं तो सजा-ए-मौत को लेकर कई विचार हैं. कुछ सही मानते हैं. कुछ गलत. फिर भी दिसंबर 2014 से अब तक करीब 333 लोगों को फांसी पर लटका चुका है पाकिस्तान. ये आंकड़ा किसी नेता के भाषण से नहीं, 'ह्यूमन राइट्स कमिशन ऑफ पाकिस्तान' का है. लगे हाथ, पाकिस्तानी प्रांतों में फांसी के नंबर्स भी पढ़ लीजिए.
पंजाब: 296
खैबर पख्तून्खवा: 14
AJK (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर): 2
बलूचिस्तान: 6
सिंध: 15
'द डॉन' की खबर के मुताबिक, अब भी 8 हजार से ज्यादा दोषियों को फांसी दी जानी बाकी है. कुछ ने फांसी के खिलाफ अपील की हुई है. जिन को फांसी पर लटकाया गया, उनमें से
299 मर्डर
7 रेप-मर्डर
7 किडनैपिंग-मर्डर
3 हाईजैक
8 मर्डर की कोशिश
4 आर्मी पब्लिक स्कूल के आतंकी
3 अटैक के दोषी थे.
अच्छा पाकिस्तान का दोस्त चीन तो सबसे ही आगे है. चीन में हर साल हजार से ज्यादा लोगों को फांसी पर लटका दिया जाता है. पांच देशों के आंकड़े भी जान ही लो कि कौन सा देश फांसी लटकाने में टॉप पर है. और अपना इंडिया कौन सी पोजिशन पर है:
चीन: 1000+
ईरान: 913
पाकिस्तान: 333
सऊदी अरब: 151
अमेरिका: 28
बांग्लादेश: 3
मेरा भारत महान: एक था याकूब मेमन...