इसी का सड़ियल नमूना हमें नज़र आया तमिलनाडु में. 6 अप्रैल की बात है. विरुधुनगर जिले में एक पार्टी मीटिंग शुरू होने वाली थी. कांग्रेस की. वहां एक फोटो जर्नलिस्ट मौजूद थे. आरएम मुथुराज नाम था उनका. मुथुराज एक साप्ताहिक पत्रिका के लिए काम करते हैं. खाली कुर्सियों की फोटो ले रहे थे. पंजा छाप पार्टी के कार्यकर्ताओं को गुस्सा आ गया. हाथ खोल दिए. पत्रकार को मारने लग गए. बाकी के पत्रकार बीच में आए. फोटोजर्नलिस्ट को बचाया.
मुथुराज को इतना पीटा गया कि उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. पुलिस में कांग्रेस वालों की कंप्लेन हुई है. मामला दर्ज हुआ है.
अब मतलब की बात सुनिए. राहुल गांधी की तस्वीरें आती हैं. पत्रकार गिर जाते हैं तो उठाने चल देते हैं. गाड़ी में बैठाते हैं. माथा पोंछते हैं. बारंबार. फुटेज बनवाते हैं. वीडियो टीवी पर चलती है.
ऐसा ही उनकी बहन करती हैं. वायनाड में पत्रकार बेहोश हो गए तो प्रियंका पत्रकार का जूता उठाए नज़र आईं थी. सोशल मीडिया पर खूब तारीफ़ हुई. फिर आते हैं इनके कार्यकर्ता. जो पत्रकारों के लिए इतने हिंसक हो पड़ते हैं.

वायनाड में घायल पत्रकार के जूते के साथ प्रियंका
खाली कुर्सियों की तस्वीरों की अलग पॉलिटिक्स है. सोशल मीडिया पर हर पार्टी वाले दूसरी पार्टी की खिल्ली उड़ाने के लिए ऐसी तस्वीरें डालते हैं, जिनमें कुर्सियां खाली हों. ऐसा करके वो ये दिखाना चाहते हैं कि सामने वाली पार्टी को जनसमर्थन नहीं मिल रहा. ऐसी कई तस्वीरें असली होती हैं, कई नकली और कई ऐसी जो अलग एंगल से खींची जाती हैं. ताकि भीड़ नज़र न आए. ये सोशल मीडिया पर होता आया है और इसे कोई कैसे ही रोक लेगा. अगर फोटोजर्नलिस्ट को खाली कुर्सी दिखेगी तो वो फोटो खींचेगा ही, आपका काम भीड़ जुटाना है. वो करो.
नमूना देखिए. एक कांग्रेस की खाली कुर्सी बताई जा रही है.

अगली तस्वीर बीजेपी की खाली कुर्सियों की बताई जा रही है. ऐसी पोस्ट्स काफी आम हैं.

इन आम सी तस्वीरों को पब्लिक तक आने से रोकने के लिए कांग्रेस के कार्यकर्ता इतने चिंतातुर हुए कि पत्रकार पर हाथ उठा दिया. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा अब किस भांति पत्रकारों के हितैषी दिखना चाहेंगे? आपकी पार्टी किस लाइन पर जा रही है. ये नेताओं और कार्यकर्ताओं के आचरण से भी नज़र आता है. और यहां तो सीधा-सीधा अपराध हुआ है. इस अपराध से कांग्रेस कैसे पिंड छुड़ाएगी?











