पेड़ पर ज्यादा फल आते हैं, तो पेड़ झुक जाता है.इसमें सीख ये है कि जब ज्यादा हासिल हो जाए तो अकड़कर, तनकर नहीं रहना चाहिए. और ज्यादा विनम्र हो जाना चाहिए. ये बात हमें पीढ़ियों से सिखाई जा रही है. मगर शायद कांग्रेस के कुछ नेता और कार्यकर्ता विनम्रता की इस सीख से अनछुए रह गए हैं. एक तस्वीर वायरल हो रही है. इसमें कांग्रेस के कुछ लोग विधानसभा चुनावों में मिली जीत के जोश में ओछापन करते दिख रहे हैं.
जीते तो उद्दंड हो गए! 11 और 12 दिसंबर को पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों का नतीजा आया. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं. यहां कांग्रेस की सरकार बनने वाली है. बहुत दिन बाद कांग्रेस ने ऐसा दिन देखा. वरना तो ज्यादातर हार और नाकामयाबी ही हाथ आ रही थी उसके. कांग्रेस में कुछ लोगों के लिए शायद ये उम्मीद से बड़ी जीत थी. जीत का जश्न मनाते हुए उन्होंने उद्दंडता दिखा दी. दो लोगों को मुखौटा लगा दिया. एक ने नरेंद्र मोदी के चेहरे वाला मुखौटा लगाया. दूसरे ने अमित शाह के चेहरे का मास्क पहना. अमित शाह वाला मास्क पहने आदमी के हाथ में ट्रे थी. उसमें चाय के कप थे. जिसने मोदी वाला मुखौटा पहना था, उसके हाथ में केतली थी. इस आदमी के कंधे पर एक कपड़ा भी है. जैसे वेटर लोग टेबल-ग्लास वगैरह साफ करने के लिए रखते हैं अपने पास. पीछे कार्यकर्ता कांग्रेस का झंडा उठाए खड़े थे. सब खुश थे. हंस रहे थे. थोड़ी खुशी जीत की होगी. थोड़ी इस बात की कि वाह, हमने क्या खूब मज़ाक उड़ाया है मोदी-शाह का. ऐसे जश्न के वक्त महाराष्ट्र के शोलापुर से कांग्रेस विधायक परिणीति शिंदे भी मौजूद थीं. परिणीति पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे की बेटी हैं.

स्मृति ईरानी को भी इस तस्वीर पर गुस्सा आया. उन्होंने ट्वीट भी किया. अच्छी बात है. जूता अपने पांव को काटता है, तो काटे का दर्द पता चलता है. स्मृति कांग्रेस को विनम्रता का उपदेश दे रही है. जबकि खुद कई बार विरोध करते हुए अति नाटकीय और आक्रामक हो जाती हैं. उम्मीद है कि वो खुद भी विनम्रता का पाठ याद रखेंगी.
सौ ढंग के तरीके होते हैं खुशी मनाने के ये सच है कि मोदी ने खुद को चायवाला कहकर खूब भुनाया है. मगर वो उनकी राजनीति है. कांग्रेसवालों ने ये मोदी और शाह का मुखौटा लगाकर जो किया है, वो ओछापन है. और सौ तरीके हो सकते हैं जश्न मनाने के. सौ ढंग के तरीके हो सकते हैं अपने विरोधी की आलोचना के. सौ तरीके हो सकते हैं अपनी जीत को जस्टिफाई करने के. ये सब अच्छी तरह से किया जा सकता है. चाय का ट्रे और केतली हाथ में पकड़वाकर क्या साबित हो जाएगा? क्या ये चायवालों की खिल्ली उड़ाना नहीं है? आप मोदी और शाह को नीचा दिखाने के चक्कर में चायवालों का स्टीरियोटाइप क्यों भुना रहे हैं? बेहद ओछी और बचकानी हरकत है ये.

मणि शंकर अय्यर ने कई बार ओछी बयानबाजी करके कांग्रेस कि किरकिरी करवाई.
और कुछ नहीं, तो मणिशंकर अय्यर से सबक ले लें एक और सीख है कांग्रेस के लिए. उन्हें मणिशंकर अय्यर से सबक लेना चाहिए. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले अय्यर ने कहा था. कि कांग्रेस अपने यहां मीटिंग में आकर चाय बेचने के लिए मोदी का स्वागत करेगी. कि कांग्रेस हेडक्वॉर्टर में मोदी को चाय बेचने के लिए एक जगह दे दी जाएगी. अय्यर के ऐसे ओछे बयानों से मोदी और बीजेपी, दोनों को खूब फायदा हुआ. बीजेपी ने 'चाय पर चर्चा' कैंपेन शुरू कर दिया. बीजेपी ने ये भी कहा कि अय्यर के ऐसे बयान सबूत हैं कि कांग्रेस गरीबों का मजाक उड़ाती है. गरीबों के खिलाफ है. अय्यर के बयान सेल्फ गोल जैसे थे.
पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर राहुल गांधी ने पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा?
भाजपा को वोट न देने पर गद्दार और देशद्रोही कहने वाले कौन हैं?




















