वीर दास अमेरिका जाते हैं और पूरे भरे कैनेडी सेंटर मे इंडिया के बारे में ये कहते हैं. हमारे देश के ऐसे ही 'इंफ्लुएंसर्स' दुनिया के सामने हमारी छवि 'सपेरों' वाली गढ़ते हैं.एक ने लिखा,
"मैंने ऐसे बहुत से 'एंटी हिंदू' इंडियंस को अपने देश को बदनाम कर पैसे कमाते हुए देखा है. अमेरिका हंसता है जब इंडिया का ऐसा मज़ाक उड़ाया जाता है. इनके लिए पैसा ही सब कुछ है. कोई दूसरे देश वाले अपने देश के साथ ऐसा नहीं करेंगे, जैसे इंडियंस करते हैं."
ट्विटर हर विषय की तरह इस विषय पर भी दो पक्षों में बटा हुआ है. हालांकि अगर आप सर्च करेंगे तो पाएंगे कि दुनिया भर के जितने भी दिग्गज कॉमेडियन हुए हैं, उनके ज्यादातर जोक्स अपने देश के खराब सिस्टम पर ही बेस्ड होते हैं. सिर्फ कॉमेडियन ही नहीं, हमारे यहां के शरद जोशी जैसे व्यंगकार भी अपने किस्से कहानियों में देश के हालात को उजागर करते आए थे. वो तो अच्छा है उस वक़्त ट्विटर नहीं था वरना पता नहीं कितनी बार बायकॉट हो चुके होते. बहरहाल, अब सवाल ये कि ऐसा क्या है वीर दास की उस कविता में जो उन्हें देश विरोधी बताया जा रहा है? हम आपको वीर की कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ाते हैं. बाकी आप खुद फैसला कर लीजिएगा कि इसमें ऑफेंड होने लायक कुछ है या नहीं!
दो भारत

















