जिस बैच को बाजार से वापस लिया गया है वह जून-जुलाई 2015 में बना था और उसकी एक्सपायरी डेट मई-जून 2018 थी. यह खेप कंपनी के गुजरात स्थित अंकलेश्वर की फैक्ट्री में बनाई गई थी.यह डिसइंटीग्रेशन के स्टैंडर्ड पर खरी नहीं उतर सकीं. इस टेस्ट में यह जानने की कोशिश की जाती है कि कितने टाइम में दवाई शरीर के अंदर टूटकर घुल जाती है. उस टाइम पर ही डिपेंड करता है कि वह कितनी देर में असर करना शुरू करेगी. कॉम्बीफ्लैम पैरासिटेमॉल और आईब्रूफेन का कॉम्बीनेशन होता है. सनोफी की मार्च 2015 में पेश सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, यह भारत में कंपनी के पांच बड़े ब्रैंड में से एक है. हाल ही में केंद्री स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक से ज्यादा दवाइयों के करीब 350 कॉम्बिनेशन बैन कर दिए थे, ताकि उनके साइड इफेक्ट्स कम किए जा सकें. कॉम्बीफ्लैम भी एक किस्म का कॉम्बीनेशन है, लेकिन उसे बैन नहीं किया गया था. हालांकि सनोफी कंपनी का कहना है कि कॉम्बीफ्लैम पूरी तरह सुरक्षित है. कंपनी के मुताबिक, भले ही डिसइंस्टीग्रेशन टाइम में देरी दर्ज की गई है, लेकिन डॉक्टरों और मरीजों को हम यह भरोसा दे सकते हैं कि इससे सेफ्टी या दवा के असर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.
आपका फेवरेट पेनकिलर बीमार है
आप बुखार और दर्द में कौन सी दवा लेते हैं? कॉम्बीफ्लैम लेते हैं तो जरा संभलकर.
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फोटो - thelallantop
आप बुखार और दर्द में कौन सी दवा लेते हैं? कॉम्बीफ्लैम लेते हैं तो जरा संभलकर. ये उन पेनकिलर में से है जिनका इस्तेमाल भारतीय घरों में कॉमन है. लेकिन इस दवाई की एक खेप सैंपल में फेल हो गई है. सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने पाया था कि इस दवा के कुछ सैंपल घटिया क्वॉलिटी के थे. इस दवाई को फ्रेंच मल्टीनेशनल फार्मास्यूटिकल कंपनी सनोफी बनाती है. कंपनी इसके कुछ बैच वापस मंगवा रही है. गुरुवार को कंपनी ने यह फैसला किया.
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