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पड़ताल : क्या अधिकारियों की लापरवाही से CM योगी का दिया चेक बाउंस हो गया?

और पैसे स्टूडेंट के अकाउंट से कट गए. जानिए पूरा मामला

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मुख्यमंंत्री योगी ने आलोक को एक लाख रुपये का चेक दिया था, जो बाउंस हो गया.
29 मई 2018. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी की बोर्ड परीक्षा के टॉपर छात्रों को सम्मानित करने के लिए लखनऊ बुलाया था. इनमें यूपी के 10 छात्रों के साथ ही बाराबंकी के 14 और छात्रों को बुलाया गया था. यूपी के जिन 10 छात्रों ने प्रदेश में नाम रोशन किया था, उनमें एक नाम आलोक मिश्रा का भी था. आलोक को प्रदेश में सातवां स्थान मिला था. उसने यूपी की बोर्ड परीक्षा में कुल 93.5 फीसदी अंक हासिल किए थे. उसकी इस उपलब्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के इंदिरा गांधी शांति प्रतिष्ठान में  खुद अपने हाथ से एक लाख रुपये का चेक और एक प्रशस्ति पत्र आलोक को सौंपा.
सीएम योगी ने आलोक के साथ ही प्रदेश भर के मेधावियों का सम्मान किया था.
सीएम योगी ने आलोक के साथ ही प्रदेश भर के मेधावियों का सम्मान किया था.


मुख्यमंत्री के हाथ से चेक लेकर आलोक खुशी-खुशी घर लौट गया. 5 जून को वह इस चेक को लेकर लखनऊ पहुंचा और वहां पर हजरतगंज स्थित देना बैंक में उस चेक को जमा कर दिया. दो दिन बाद भी जब उसके खाते में पैसे नहीं आए, तो वो सात जून को फिर से देना बैंक पहुंचा. पता चला कि उसका चेक बाउंस हो गया है. इसकी वजह बताते हुए बैंक अधिकारियों ने आलोक से कहा कि चेक पर किए गए अधिकारी के हस्ताक्षर पुराने हस्ताक्षर से मेल नहीं खाते हैं, लिहाजा चेक बाउंस हो गया.
क्या सरकारी अधिकारियों ने लापरवाही की थी?
Barabanki check

आलोक को मुख्यमंत्री योगी ने जो चेक दिया था वो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का चेक था. चेक का नंबर 974926 था, जिसपर डीआईओएस राजकुमार यादव के हस्ताक्षर थे. राजकुमार यादव बाराबंकी के नए डीआईओएस हैं. उन्होंने 28 मई को ही बाराबंकी में काम संभाला था और ये चेक भी 28 मई को ही जारी किया गया था. इस वजह से बैंक में पुराने डीआईओएस रहे अरुण कुमार दुबे के सिग्नेचर बदल नहीं पाए थे. नया चेक जारी हुआ तो उसपर अरुण कुमार दुबे की जगह पर राजकुमार यादव के हस्ताक्षर थे, जिसकी वजह से बैंक में हस्ताक्षऱ का मिलान नहीं हो पाया और चेक बाउंस हो गया.
वक्त पर नहीं पहुंचा था डीएम का पत्र

बाराबंकी डीएम उदयभान त्रिपाठी.

सरकारी खाते से पैसा निकालने की एक नियत प्रक्रिया होती है. इसके तहत डीआईओएस ने भले ही चेक पर साइन कर दिया हो, लेकिन इसके साथ ही डीएम का एक पत्र भी बैंक को भेजा जाता है. बाराबंकी के डीएम उदयभान त्रिपाठी ने बैंक के नाम पत्र जारी भी कर दिया था, लेकिन वो पत्र चेक लगाने के बाद बैंक के पास पहुंचा था. बैंक अधिकारियों के मुताबिक अगर वो पत्र पहुंचने के बाद डीआईओएस का चेक मिला होता तो पैसे जारी कर दिए गए होते.
क्या छात्र के खाते से काट लिए गए पैसे?
इस मामले में जब दि लल्लनटॉप ने आलोक मिश्रा से बात की तो उन्होंने बताया  कि उनके खाते से 377 रुपये कट गए हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि उन्हें नया चेक मिल गया है. शनिवार और रविवार को बैंक बंद होने की वजह से वो चेक को बैंक में नहीं जमा करवा पाए हैं. अब वो सोमवार को बैंक में चेक जमा करेंगे. क्या उन्हें 377 रुपये के कटने का दु:ख है के जवाब में आलोक ने कहा कि उन्हें खुशी है कि सीएम की ओर से उन्हें 1 लाख रुपये दिए गए हैं. अब वो आगे और भी मेहनत करने की कोशिश करेंगे.
फिर से जारी किया गया चेक
डीआईओएस राजकुमार यादव ने आलोक को एक लाख रुपये का नया चेक सौंपा है.
डीआईओएस राजकुमार यादव ने आलोक को एक लाख रुपये का नया चेक सौंपा है.

जब चेक बाउंस हो गया, तो डीआईओएस राजकुमार यादव ने आलोक के नाम एक नया चेक जारी कर दिया. उन्होंने 9 जून को बाकायदा मीडिया को अपने ऑफिस बुलाया और वहां पर आलोक को नया चेक सौंपा. इस दौरान डीआईओएस राजकुमार यादव ने कहा कि और किसी भी छात्र का चेक बाउंस नहीं हुआ है और सभी छात्रों को उनके खाते में पैसे भेज दिए गए हैं. वहीं डीएम उदयभान त्रिपाठी ने भी पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं.


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