असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने AFSPA को लेकर कुछ साकारात्मक होने की उम्मीद जताई है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का कहना है कि राज्य में AFSPA यानी Armed Forces (Special Powers) Act के बारे में इस साल कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने कहा कि नगालैंड में भी AFSPA को लेकर कुछ सकारात्मक होने की उम्मीद है. शनिवार, 1 जनवरी को एक संवाददाता सम्मेलन में असम के सीएम ने कहा कि उग्रवाद के कमजोर पड़ने के चलते असम के पांच-छह जिलों को छोड़ कर राज्य से सेना हटा ली गई है और जब इस साल AFSPA की समीक्षा की जाएगी, तब राज्य सरकार कोई व्यावहारिक फैसला लेगी. पूर्वोत्तर के विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा AFSPA को अक्सर क्रूर अधिनियम बताया जाता रहा है, क्योंकि इसके तहत सशस्त्र बलों को अशांत इलाकों में कानून व्यवस्था कायम रखने के लिए विशेष शक्तियां दी गई हैं. इसे हटाने की मांग नागरिक समाज संस्थाएं और मानवाधिकारों के पैरोकार करते रहे हैं. असम में नवंबर 1990 में AFSPA लगाया गया था और तब से इसे हर छह महीने पर राज्य सरकार द्वारा समीक्षा के बाद बढ़ा दिया जाता है. सरमा ने कहा,
जहां तक AFSPA की बात है, असम में 2022 में कुछ तर्कसंगत कदम उठाए जाएंगे...कैसे और कब, हम नहीं जानते, लेकिन मैं आशावादी हूं. हम 2022 को उम्मीद भरे वर्ष के तौर पर देख रहे हैं. AFSPA के बारे में कुछ सकारात्मक होगा.
नगालैंड में AFSPA जारी रहने के बारे में उन्होंने कहा,
केंद्र ने इस विषय की जांच के लिए 26 दिसंबर को एक समिति गठित की है. समिति 45 दिनों में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और मुझे उम्मीद है कि वहां कुछ सकारात्मक होगा.
नगालैंड में सेना की गोलीबारी में पिछले साल दिसंबर में 13 आम लोगों के मारे जाने और एक अन्य घटना में एक और व्यक्ति के मारे जाने के बाद असम में भी AFSPA हटाने की मांग ने जोर पकड़ लिया है. AFSPA मणिपुर में (इंफाल नगर परिषद क्षेत्र को छोड़ कर), अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग, लोंगदिंग और तिरप जिलों में और असम से लगने वाले उसके सीमावर्ती जिलों के आठ पुलिस थाना क्षेत्रों के अलावा नगालैंड और असम में लागू है. केंद्र ने इस हफ्ते की शुरूआत में नगालैंड में इसे छह महीने के लिए बढ़ा दिया है. सरमा ने यह भी कहा कि राज्य में जनजातीय उग्रवाद का युग समाप्त हो गया है, क्योंकि सभी उग्रवादी संगठन सरकार के साथ बातचीत के लिए आगे आ रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि उल्फा (आई) द्वारा संप्रभुता की मांग एक बाधा है और उनकी सरकार गतिरोध दूर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि जनजातीय लोग अब उग्रवाद के खिलाफ दृढ़ता से खड़े हैं. सरमा ने कहा कि जनजातीय उग्रवाद का युग समाप्त हो गया है...हमारी अंतिम बाधा उल्फा (आई) है. उसे छोड़ कर, अन्य सभी संगठनों ने हथियार डाल दिये हैं.
क्या है AFSPA?
AFSPA यानी आर्म्ड फोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट. इसे हिंदी में ‘सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून’ कहते हैं. सरकार इस कानून को आधिकारिक तौर पर देश के उन हिस्सों में लागू करती है, जो अशांत होते हैं. यानी वो इलाके जहां आतंकवाद या उग्रवाद जैसे हालात हों. AFSPA जिन इलाकों में लागू हो जाता है, वहां सेना के पास ये अधिकार होता है कि वो बिना वॉरंट किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग भी कर सकती है.