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करंट लगा बच्चा 3 घंटे तड़पता रहा क्योंकि दो एंबुलेंस स्वस्थ मंत्री की सेवा में लगी रहीं

मामला छत्तीसगढ़ का है, जहां अधिकारियों की लापरवाही से बच्चे की जान पर बन आई थी.

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छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री केदार कश्यप सरकारी उद्घाटन कार्यक्रम के लिए दंतेवाड़ा में थे.
कानपुर और उसके आस-पास के इलाकों में एक शब्द खासा चर्चित है- भौकाल. भौकाल टाइट है, तब तो सब ठीक है. अगर इसमें कमी आ रही है तो इसे फिर से दुरुस्त करने के लिए हाथ-पैर मारे जाने लगते हैं. कोई मंत्री हो, छोटा सा नेता हो, कोई अधिकारी हो, पुलिसवाला हो या आम आदमी. कमोबेश सब अपना भौकाल टाइट ही रखना चाहते हैं. इस भौकाल की बात इसलिए कि छत्तीसगढ़ में एक बच्चे के साथ हादसा हुआ है, जो मंत्री के इस भौकाल के चक्कर में मरते- मरते बचा.

मामला क्या है?

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इस मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सरकार के पास पर्याप्त एम्बुलेंस मौजूद हैं.

अभी कुछ ही दिन पहले केंद्रीय कैबिनेट ने लाल-नीली बत्तियों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी. मनमाने ढंग से ही सही, सबने इसे माना. साथ में ये भी मानना पड़ा कि इससे उनके भौकाल में कमी आई है. अब अधिकारी का भौकाल भले कम हो जाए, लेकिन उसके क्षेत्र में कोई मंत्री जा रहा है, तो मंत्री का भौकाल कम नहीं होना चाहिए. यही हुआ भी. छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री केदार कश्यप को 1 और 2 सितंबर को सरकारी योजनाओं के तहत बनी सरकारी इमारतों और पुलों का उद्घाटन करना था. मंत्रीजी पहुंच गए दंतेवाड़ा उद्घाटन करने और प्रशासन ने प्रोटोकॉल के नाम पर भौकाल मेनटेन कर दिया. सरकारी अस्पताल में दो ही एम्बुलेंस मौजूद थीं और दोनों को ही लगा दिया मंत्रीजी के काफिले में.

क्या करते मरीज?

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एम्बुलेंस के अभाव में बच्चा तीन घंटे तक तड़पता रहा.

दो दिनों तक एम्बुलेंस मंत्रीजी के काफिले में रही और मरीज परेशान होते रहे. इसी बीच 1 सितंबर को दंतेवाड़ा के गीदम में एक बच्चा करंट लगने से झुलस गया. सीएचसी में इलाज नहीं था तो डॉक्टरों ने उसे मेडिकल कॉलेज भेजने की सिफारिश कर दी. लेकिन वो जाता कैसे, एम्बुलेंस तो मंत्रीजी के काफिले में थीं और बच्चे के पिता के पास पैसे नहीं थे कि प्राइवेट गाड़ी से ले जा सके. तीन घंटे तक 14 साल का बच्चा तड़पता रहा, लेकिन डॉक्टर और अधिकारी प्रोटोकॉल का हवाला देकर हाथ झाड़ते रहे. लोगों का गुस्सा भड़कना शुरू हुआ तो जल्दी-जल्दी में दूसरे अस्पताल से एम्बुलेंस मंगाई  और बच्चे को अस्पताल भेजा गया.

मंत्रीजी ने माना, गलती हुई है

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मंत्री केदार कश्यप ने गलती मानी है और जांच के आदेश दिए हैं.

जब मंत्री केदार कश्यप से इस बारे में पूछा गया तो पहले तो उन्होंने कह दिया कि ये प्रोटोकॉल वालों से पूछो. बाद में उन्होंने कहा कि उनके काफिले में एक ही एम्बुलेंस थी और दूसरी उनके काफिले से अलग गीदम में थी. किसी गलतफहमी की वजह से एम्बुलेंस गीदम चली गई थी, जिसे नहीं जाना चाहिए था. इसकी जांच करवाई जाएगी.


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वीडियो देखें:
https://www.youtube.com/watch?v=6T73c7yezNI
 

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