दिल्ली के स्वास्थ्य ढांचे पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट आयी है. इसमें पिछले छह सालों में गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन, लापरवाही और जवाबदेही की कमी को उजागर किया गया है. यह रिपोर्ट शुक्रवार, 28 फरवरी को दिल्ली विधानसभा में पेश की गई.
'14 अस्पतालों में ICU, 16 में ब्लड बैंक और 12 में एम्बुलेंस नहीं...' CAG रिपोर्ट ने दिल्ली का सच बताया
CAG की रिपोर्ट आ गई है. इसमें Delhi के Hospitals और Mohalla Clinics का पिछले छह साल का लेखा-जोखा है. कैग की रिपोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों में जरूरी सेवाओं की कमी को उजागर किया गया है. क्या-क्या है इसमें?
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- कैग की रिपोर्ट में दिल्ली के अस्पतालों में जरूरी सेवाओं की कमी को उजागर किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के 27 अस्पतालों में से 14 में ICU नहीं हैं, और 16 में ब्लड बैंक नहीं हैं. 8 अस्पतालों में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं है, और 15 अस्पतालों में शवगृह (मॉर्चरी) नहीं हैं. 12 अस्पताल बिना एम्बुलेंस सेवा के चल रहे हैं.
- मोहल्ला क्लीनिक आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल की महत्वाकांक्षी योजना रही है. लेकिन कैग का कहना है कि मोहल्ला क्लीनिक और आयुष डिस्पेंसरियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. कई मोहल्ला क्लीनिकों में शौचालय, बिजली बैकअप और चेकअप टेबल तक नहीं हैं. आयुष डिस्पेंसरियों में भी इसी तरह की समस्याएं पाई गई हैं.
- दिल्ली के अस्पतालों में स्वास्थ्यकर्मियों की भारी किल्लत है. दिल्ली के अस्पतालों में 21% नर्सों की कमी, 38% पैरामेडिक्स की कमी, और कुछ अस्पतालों में 50-96% डॉक्टरों एवं नर्सों की कमी दर्ज की गई है. राजीव गांधी और जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में ऑपरेशन थिएटर, आईसीयू बेड और प्राइवेट रूम खाली पड़े हैं. ट्रॉमा सेंटरों में इमरजेंसी इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं.
- कोविड आपातकालीन फंड का सही इस्तेमाल नहीं होने की भी रिपोर्ट आई है. कैग की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 के लिए आवंटित ₹787.91 करोड़ में से सिर्फ ₹582.84 करोड़ खर्च हुए. स्वास्थ्यकर्मियों के लिए रखे ₹30.52 करोड़ नहीं खर्च हुए. आवश्यक दवाओं और PPE किट के लिए रखे ₹83.14 करोड़ भी बिना खर्चे रह गए.
- दिल्ली के अस्पतालों में बिस्तरों की कमी एक बड़ा मुद्दा है. कोविड के दौरान लोग दर-दर भटकते हुए देखे गए थे. सरकार ने 32,000 नए अस्पताल बेड जोड़ने का वादा किया था, लेकिन सिर्फ 1,357 (4.24%) बेड ही बढ़ाए गए. कई अस्पतालों में 101% से 189% तक की ओवरऑक्यूपेंसी देखी गई, जिससे मरीजों को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ा.
- अस्पतालों की परियोजनाओं में देरी की बात सामने आई है और लागत में बढ़ोतरी दर्ज हुई है. मुख्य अस्पताल परियोजनाएं 3-6 साल की देरी से चल रही हैं. इस वजह से लागत ₹382.52 करोड़ तक बढ़ गई. इंदिरा गांधी अस्पताल, बुराड़ी अस्पताल और MA डेंटल फेज-2 जैसी परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं.
- यह जगज़ाहिर है कि दिल्ली के अस्पतालों में सर्जरी के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है. लोक नायक अस्पताल में सामान्य सर्जरी के लिए 2-3 महीने और जलने व प्लास्टिक सर्जरी के लिए 6-8 महीने की प्रतीक्षा करनी पड़ती है. CNBC अस्पताल में बच्चों की सर्जरी के लिए 12 महीने तक इंतजार करना पड़ता है.
यह विधानसभा में पेश की जाने वाली CAG की दूसरी रिपोर्ट होगी. इससे पहले 25 फरवरी को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली आबकारी नीति पर CAG रिपोर्ट पेश की थी.
वीडियो: केजरीवाल के खिलाफ शराब घोटाले वाली CAG रिपोर्ट में क्या पता चला?



















