The Lallantop

एक रुपये की कॉल सेना के जवान को 5 रुपये 75 पैसे की पड़ने लगी है

थैंक्स टू बीएसएनएल, राजनाथ सिंह से भी दुखड़ा बताया गया. कुछ नहीं हुआ.

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
हां तो जैसा कहा जाता है. "सैनिकों को कुछ न कहना. फौजी हमारी रक्षा करते हैं. आप एसी कमरे में बैठे हैं क्योंकि वहां कोई जवान आपकी हिफाजत को खडा है. सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक किया. वाह सरकार, अच्छे दिन. अच्छी सरकार. ऐसा पहले पभी नहीं हुआ. येन-तेन-प्रकारेण" लेकिन सुनो सरकार सैनिकों के लिए कितनी संवेदनशील है. जियो सिम होगी आपके पास? मुफ्त कॉल. मुफ्त इंटरनेट. ऐसा जुगाड़ लगा ही लिए होंगे. लेकिन आपके बॉर्डर पर सैनिकों का क्या हाल है. सरहद पर जो सिपाही तैनात होता है, वो अपने घरवालों से बात कैसे करता है? बीएसएनएल के सैटेलाईट फोन से. पांच साल पहले जब जवानों के लिए यह सुविधा शुरू हुई थी, तब एक कॉल एक रुपये की एक मिनट के होती थी. लेकिन इस साल से बीएसएनएल ने इसकी दर बढ़ाकर 5 रुपये 75 पैसे हर मिनट के हिसाब से कर दी.
ये जो सैटेलाईट फोन से कॉल किया जाता है, उसका खर्चा कौन देता है? वही सैनिक. अब चाहे वो जंगल में हो बियाबान में हो, बर्फ में खपे, रेत में धंसे. उसे नेटवर्क तो मिलता नहीं. फौज की प्राइवेसी अलग, तो प्राइवेट कंपनी की हेल्प भी नहीं ली जा सकती. आपके जैसे वो सिम पोर्ट नहीं करा सकते.
संदेशे आते हैं का ज़माना जब गया और फोन हर हाथ आया तो सरकार ने सब्सिडी देकर बीएसएनएल की डीएसपीटी यानी डिजिटल सैटेलाईट फोन टर्मिनल शुरू की. अभी देश भर में इंटरनेशनल बॉर्डर के साथ ऐसी जगह जहां मोबाइल नेटवर्क नही हैं, वहां 400 डीएसपीटी सेट लगे हैं, जिसमें अकेले जैसलमेर सीमा पर 100 से ज्यादा डीएसपीटी सेट लगे हुए हैं. पहले रेट ठीक थे. फिर वो दिन आया. अप्रैल 2016. बीएसएनएल ने कहा कि अब सब्सिडी का टाइम खत्म हो गया. बीएसएनएल को बुत घाटा लग रहा है, इसलिए कॉल चार्ज बढ़ाए गए हैं. बीएसएफ के डीआईजी ने रिक्वेस्ट की. सैनिकों ने बॉर्डर पर पहुंचे गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी अपना दुःख बताया मगर अब तक कुछ नहीं हुआ.

भारत माता की जय

Advertisement

Advertisement
Advertisement