सरकार को लेटर लिखा
निर्यातक संघों ने वाणिज्य मंत्रालय को लेटर लिखा है. बताया है कि चीन और हॉन्ग-कॉन्ग के कस्टम अधिकारी भारत के एक्सपोर्ट कन्साइनमेंट को रोक रहे हैं. इसमें कहा गया है कि चीन-हॉन्ग-कॉन्ग के कस्टम विभाग की ओर से फिजिकल जांच की जा रही है, इसकी वजह से क्लियरेंस में काफी देरी हो रही है और आयात की लागत बढ़ रही है.
चीन का प्रत्यक्ष निवेश भारत में कम है लेकिन अप्रत्यक्ष तरीके से उसका निवेश काफी ज़्यादा है. चाहे वो स्टार्टअप इकॉनमी में हो या डिजिटल इकॉनमी में. फोटो: India TodayFIEO के अध्यक्ष शरद कुमार सराफ का कहना है कि एसोसिएशन ने वाणिज्य मंत्रालय से आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करने को कहा है. ताकि यह स्पष्ट हो सके कि भारत ने चीन से आने वाले समान को बंदरगाहों पर रोकने के लिए नहीं कहा है.
पहले भारत ने चीन का माल रोका?
ऐसी खबरें आई थीं कि चीन से आने वाले कंटेनर बड़े पैमाने पर मुंबई और चेन्नई बंदरगाह पर जमा हुए हैं. निर्यातकों ने वाणिज्य मंत्रालय को लिखे लेटर में अनुरोध किया है कि केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड CBIC के सामने इस मसले को उठाया जाए. यदि इसे रोकने के बारे में कोई आधिकारिक निर्देश नहीं है, तो CBIC इसके बारे में आधिकारिक रूप से बयान जारी करे, ताकि इसकी जानकारी चीन और हॉन्ग-कॉन्ग के आयातकों को दी जा सके. ऐसा करने से वे इस मसले को अपने सीमा शुल्क विभाग के सामने रख सकेंगे.कोरोना की वजह से हुआ ऐसा
आयातकों को बताया गया है कि कोविड-19 की वजह से कंसाइनमेंट की जांच थोड़ी ज्यादा हो रही है. सैनिटाइज के लिए जो भी प्रक्रिया है, वह की जा रही है. इससे चीन से आए माल को मिलने में समय लग रहा है. तमाम कंसाइनमेंट की फिजिकल जांच के कारण क्लियरेंस में समय लग रहा है. हालांकि इस प्रक्रिया से आयातक खुश नहीं हैं. इस वजह से काफी कंसाइनमेंट अटक गए हैं. इससे आयातकों ने इस मुद्दे को स्थानीय कस्टम अधिकारियों के सामने भी उठाया है. हालांकि कस्टम विभाग की ओर से यह आश्वासन मिला है कि कुछ दिन में उनके माल को क्लियर कर दिया जाएगा.
भारत और चीन के बीच तनाव का असर बिजनेस पर पड़ रहा है.वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हो सकता है कि कुछ कंटेनर किसी खुफिया सूचना या जोखिम प्रबंधन के तहत रखे गए हों, लेकिन यह रुटीन कवायद है. अक्सर सुरक्षा अलर्ट के बाद कंटेनर और कंसाइनमेंट रोक लिए जाते हैं और बाद में उनकी क्लियरेंस होती है. यह कोई नई बात नहीं है. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इसका सीमा पर जारी तनाव से कोई लेना-देना नहीं है.
क्या है भारत की प्लानिंग?
सीमा पर विवाद की वजह से भारत इस समय चीन से आने वाले माल पर अपनी निर्भरता कम करने की सोच रहा है. हालांकि इसमें अभी भी कोई बहुत सफलता नहीं मिली है. सरकार जरूरी सेवाओं को छोड़कर बाकी सेवाओं के आयात पर अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है. इसमें हालांकि आयात ड्यूटी बढ़ाने जैसे कुछ मुद्दे ही शामिल हैं, क्योंकि सरकार विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के मुताबिक पूरी तरह से आयात पर बैन नहीं लगा सकती है.चीनी सामान बैन करने की मांग के बीच सरकार का आदेश- प्रोडक्ट का 'कंट्री ऑफ ओरिजिन' बताना होगा






















