डियर उदित राज, मुझे आपसे दो बातें कहनी हैं. दो क्या, तीन कहूंगा. पहली बात: अगर आप ओलंपिक में मेडल लाने का ख्वाब बुनते हैं तो उसके लिए ये शर्त होती है कि सभी देशों के साथ आप के देश के मोड़ा-मोड़ी को कम्पटीशन लगाना होगा. अब जब वो सब बढ़िया इक्विपमेंट और कोच और खान-पान के साथ ट्रेनिंग करते हैं तो आप ये चाहते हैं कि यहां के एथलीट जितना बन सकता है, उतने से काम चला लें. वाह! खाली पार्टिसिपेशन सर्टिफ़िकेट की चाह रखते हो क्या उदित जी? मतलब अगर कोई स्विमिंग का भावी चैंपियन तालाब-पोखरे में प्रैक्टिस करने को मजबूर है तो आपको अन्दर ही अन्दर कुछ खाता सा महसूस नहीं होता है? दूसरी बात: यूसेन बोल्ट बीफ़ खाता है. आप कहते हो कि इससे उसने मेडल जीत लिया. गजब! आपको ये बता दूं कि दुनिया में यूरुग्वे का पर-कैपिटा बीफ़ कन्ज़म्प्शन सबसे ज़्यादा है. उसके बाद अर्जेंटीना का नम्बर आता है. लेकिन इन देशों से कभी कोई यूसेन बोल्ट नहीं आया. क्यों? मैं बताऊं? क्योंकि यूसेन बोल्ट बीफ़ खाने से नहीं अपनी ट्रेनिंग और कोचिंग के दम पर दुनिया का सबसे तेज़ इंसान बना है. और बीफ़ खाना उसकी ट्रेनिंग का एक हिस्सा मात्र है. यूसेन बोल्ट की डायट देखी जाए तो वो सुबह नाश्ते में अंडे की सैंडविच, लंच में पास्ता के साथ कॉर्न बीफ़ खाते हैं. दिन भर आम, अनन्नास और सेब खाते रहते हैं. डिनर में भुना हुआ मुर्गा हौंकते हैं. इस हिसाब से उनके खान-पान में भी बीफ़ का हिस्सा काफ़ी कम है. तीसरी बात: आपकी बात मान भी ली जाए तो ज़रा लिखित में ये ज़रूर बतला दीजियेगा कि बीफ़ खाने वालों को आप ही की पार्टी वाले सांस लेने लायक छोड़ देंगे. अगर आप इसके लिए राज़ी हो जायें तो कोई दिक्कत वाली बात रह नहीं जाएगी. क्या है कि आजकल सुर्ख़ियों में या तो डोनाल्ड ट्रम्प रहते हैं या गोरक्षक. अच्छा, जाते-जाते एक बात और. आपका फ़ोन कहीं आपका भांजा तो नहीं चला रहा था? ये भी पढ़ो:










