
मुहम्मद मियां का डंडा बस डराने के लिए नहीं उठा. उन्होंने सामने वाले को असॉल्ट भी किया
मनोज का क्या कहना है? 'अमर उजाला' ने मनोज से बात की.
मनोज चंदौसी से जूते-चप्पल ले जाकर संभल में दुकानों पर बेचते हैं. मनोज का कहना है कि वो काम के सिलसिले में ही 24 दिसंबर को संभल गए थे. बाज़ार में निकले. दुकानों पर जूते-चप्पल पहुंचाने का काम पूरा किया. पैसे आने की खुशी में थोड़ी शराब पी ली. वहां से फिर अपनी बहन के घर जाने के लिए निकले. बहन यहीं संभल में रहती हैं. SDM दफ़्तर की तरफ से गुजर रहे थे. वहां कंपाउंड में कुछ लोग बैठकर बातें कर रहे थे. PM मोदी के ऊपर बात हो रही थी. ऐसे ही बातों-बातों में मनोज ने कह दिया कि मोदी को वोट मत देना, अखिलेश और मायावती को वोट देना. इसी बात पर बीजेपी नेता ने उन्हें पीटना शुरू कर दिया.
वायरल वीडियो में क्या दिखता है? वायरल वीडियो में दिखता है कि घटना बीच सड़क पर हो रही है. अगल-बगल और भी लोग खड़े हैं. बीजेपी नेता के हाथ में एक डंडा है. वो उस डंडे को मनोज के मुंह में डालने की कोशिश कर रहे हैं. ये कोशिश सांकेतिक नहीं है. डंडा जोर से मनोज के होठों को छूता है. बल्कि डंडे के जोर से मनोज का मुंह एक ओर घूम भी जाता है. फिर मुहम्मद मियां डंडे के सहारे उसका मुंह सामने की तरफ घुमाते हैं. मुहम्मद मियां ये सब करते हुए उस आदमी से कुछ कह भी रहे हैं. क्या, ये साफ सुनाई नहीं दे रहा है. फिर मनोज वहां से जाने लगता है. मुहम्मद मियां उसे मारने के अंदाज़ में डंडा दिखाते हैं.

पुलिस ने नारेबाजी करने वाले को हिरासत में लिया. उनके मुताबिक, वो नशे में था. मगर मुहम्मद मियां के खिलाफ किसी कार्रवाई की खबर नहीं है.
जानिए, प्रशासन ने कैसे यू-टर्न लिया ये घटना संभल के SDM दफ्तर के बाहर हुई. SDM की तरफ से तत्काल कार्रवाई ये हुई कि मनोज को हिरासत में ले लिया. जेल भी भेज दिया गया. फिर बाद में जब ये मामला उछला, तो प्रशासन का सुर बदला. मनोज को जमानत पर रिहा किया गया. पुलिस ने मुहम्मद मियां के खिलाफ उसका बयान भी लिया. इस तहरीर के आधार पर रिपोर्ट भी दर्ज की गई. मुहम्मद मियां पर जानलेवा हमला करने, अनुसूचित जाति के शख्स का उत्पीड़न करने और जान से मारने की धमकी का आरोप दर्ज़ हुआ है. मामला बड़ा होने पर पुलिस अधीक्षक का भी बयान आया. बोले कि कानून हाथ में लेने का हक किसी को नहीं है. अगर मनोज ने कोई ग़लती की थी, तो उसकी शिकायत की जानी चाहिए थी. न कि उसे असॉल्ट किया जाना चाहिए था.
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