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‘बीजेपी की महिला विरोधी नीतियों से पर्दा हटा’, बिलकिस बानो केस में फैसले पर नेताओं ने क्या कहा?

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि बीजेपी बिलकिस बानो के बलात्कारियों की मदद कर रही थी.

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी से बिलकिस बानो से माफी मांगने को कहा. (फोटो- ट्विटर)

सुप्रीम कोर्ट ने बिलकिस बानो (Bilkis Bano Gangrape) गैंगरेप मामले में 11 दोषियों की रिहाई के आदेश को रद्द कर दिया है. मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की तकलीफ को समझना जरूरी है और पुराना फैसला (जिसके बाद दोषियों की रिहाई हुई) धोखे से हासिल किया गया था. 

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इस फैसले पर लगातार राजनैतिक टिप्पणियां आ रही हैं. कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने फैसले का स्वागत करते हुए X पर पोस्ट किया,

“ये गुजरात सरकार पर एक खून के धब्बे की तरह अंकित रहेगा. सरकार ने दोषियों को अवैध रूप से रिहा कराया था और इसे एक बीजेपी नेता ने इस आधार पर सही ठहराया था कि वो सभी ब्राह्मण थे.”

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थरूर ने कहा कि ये न्याय की जीत है साथ ही उन बुनियादी मानवीय मूल्यों की भी, जो पारंपरिक रूप से हमारी सभ्यता को जीवित रखते हैं.

कांग्रेस जनरल सेक्रेट्री प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि आखिरकार न्याय की जीत हुई. उन्होंने कहा,

“इस आदेश से भारतीय जनता पार्टी की महिला विरोधी नीतियों पर से पर्दा हट गया है. इस फैसले के बाद न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा. अपनी लड़ाई बहादुरी से जारी रखने के लिए बिलकिस बानो को बधाई.”

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AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि बीजेपी को बिलकिस बानो से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने कहा,

“मैं पहले दिन से कह रहा हूं कि बीजेपी एक पार्टी के तौर पर बिलकिस बानो के बलात्कारियों की मदद कर रही है. अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ये फिर से सच साबित हो गया है. मैं बिलकिस बानो की बहादुरी को सलाम करता हूं. मैं डिमांड करता हूं कि गुजरात और केंद्र की सरकार बिलकिस से माफी मांगे.”

CPI (M) नेता वृंदा करात ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,

“हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हैं. कम से कम ये फैसला न्याय की कुछ उम्मीद जगाता है. गुजरात सरकार ने जो दस्तावेज स्वीकार किए थे, कोर्ट ने उन्हें फर्जी माना है.”

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने फैसले के बाद बीजेपी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा,

“चुनावी फायदे के लिए ‘न्याय की हत्या’ की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है. आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर देश को बता दिया कि ‘अपराधियों का संरक्षक’ कौन है. बिलकिस बानो का अथक संघर्ष, अहंकारी बीजेपी सरकार के विरुद्ध न्याय की जीत का प्रतीक है.”

(ये भी पढ़ें: बिलकिस बानो पर SC के फैसले के बाद भी छूट सकते हैं बलात्कारी, क्या कहते हैं नियम?)

कोर्ट का फैसला

बिलकिस बानो मामले पर फैसले सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार के पास सजा में छूट के लिए आवेदनों पर विचार करने या उन पर आदेश पारित करने का कोई अधिकार नहीं था.

बता दें कि बिलकिस बानो ने इस मामले में 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की थीं. पहली याचिका दोषियों की रिहाई के खिलाफ थी. इसमें सभी दोषियों को फिर से जेल भेजने की मांग की गई थी. दूसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर विचार करने की मांग की गई है जिसमें कहा गया था कि दोषियों की रिहाई पर फैसला गुजरात सरकार करेगी. बिलकिस बानो का कहना था कि जब केस का ट्रायल महाराष्ट्र में चला था फिर गुजरात सरकार फैसला कैसे ले सकती है?

क्या है मामला?

दरअसल, 3 मार्च 2002 को गुजरात दंगों के दौरान दाहोद में बिलकिस बानो के परिवार पर हमला हुआ था. इस दौरान उनका गैंगरेप किया गया. उनके परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई. बिलकिस तब 5 महीने की गर्भवती थीं और गोद में 3 साल की एक बेटी भी थी. इस दौरान दंगाइयों ने उनकी 3 साल की बेटी को पटक-पटक कर मार डाला.

साल 2004 में गैंगरेप के आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. इसी साल केस को अहमदाबाद से मुंबई ट्रांसफर कर दिया गया. बिलकिस बानो ने सबूतों के साथ संभावित छेड़छाड़ और गवाहों के लिए खतरे का मुद्दा उठाया था.

जनवरी 2008 में CBI की स्पेशल कोर्ट ने 11 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. 2017 में इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी. सभी को पहले मुंबई की आर्थर रोड जेल और इसके बाद नासिक जेल में रखा गया था. करीब 9 साल बाद सभी को गोधरा की सब-जेल में भेज दिया गया था.

वीडियो: बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दोषियों की रिहाई का आदेश निरस्त

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