भारतीय रेलवे की वंदे भारत ट्रेन शुरुआत से ही गलत कारणों से चर्चा में रही है. कभी लोग इस पर पत्थर बरसाते हैं तो कभी मामूली टक्कर से ही इस ट्रेन के इंजन का आगे का हिस्सा खुल जाता है. ट्रेन अपने महंगे किराए को लेकर भी नापसंद की गई है. बताया गया है कि इस कारण नागपुर-बिलासपुर रूट पर चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को बंद किया जा रहा है. केवल थोड़े समय के लिए. अब अगले कुछ वक्त तक इस रूट पर तेजस एक्सप्रेस को लाया गया है.
रेलवे ने कहां वंदे भारत एक्सप्रेस को 'बंद' कर दिया? वजह जानकर कहेंगे- ये तो होना ही था!
आखिर रेलवे को ऐसा करना क्यों पड़ा?
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दरअसल नागपुर-बिलासपुर रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस की ऑक्युपेंसी काफी कम है. जनवरी महीने तक ये रेट 55 पर्सेंट रहा. आसान भाषा में कहें तो इस रूट पर लोग वंदे भारत ट्रेन में सफर नहीं कर रहे हैं. अगर ट्रेन में कुल 100 सीटें हैं तो औसतन केवल 55 सीटों के लिए टिकट बुक किए गए हैं. 45 सीटें खाली जा रही हैं. न्यूज एजेंसी पीटीआई की फरवरी की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 8 अलग-अलग ट्रेन रूटों पर चल रही वंदे भारत ट्रेनों में से सबसे कम ऑक्युपेंसी रेट नागपुर-बिलासपुर वंदे भारत एक्सप्रेस का बताया गया है.
ऐसे में ट्रेन में लगाए गए 16 कोचों की संख्या को आधा करने का फैसला किया गया है. अब नागपुर-बिलासपुर वंदे भारत एक्सप्रेस 8 कोचों के साथ चलेगी. ये काम होने तक रूट पर तेजस एक्सप्रेस चलाई जाएगी. 11 डिब्बों वाली इस ट्रेन में 2 एक्जिक्यूटिव श्रेणी के कोच हैं. 7 डिब्बों में कुर्सियों की व्यवस्था है. वहीं ट्रेन को कंट्रोल करने के लिए 2 पावर कार कोच हैं.
दक्षिण-पूर्व केंद्रीय रेलवे की तरफ से जारी एक बयान के मुताबिक जब तक सिकंदराबाद-तिरुपति रूट पर चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस को और रेक नहीं मिल जाते, तब तक नागपुर-बिलासपुर रूट पर तेजस एक्सप्रेस चलेगी. रेलवे ने बताया कि सिकंदराबाद-तिरुपति वाले रूट पर ऑक्युपेंसी काफी ज्यादा है. इसीलिए वहां चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के कोचों को 8 से बढ़ाकर 16 किया जाएगा.
मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक नागपुर-बिलासपुर रूट के लिए तेजस एक्सप्रेस का किराया वंदे भारत एक्सप्रेस से कम है. तमाम स्टेशनों के किरायों में कम से कम 50 से 100 रुपये का अंतर है. पिछले साल दिसंबर महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिलासपुर-नागपुर वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दी थी. मकसद था 7 से 8 घंटे की यात्रा को साढ़े 5 घंटे में पूरा करना. लेकिन यात्रीगण वंदे भारत के किराए से नाखुश नजर आए. उन्हें ये महंगा लगा जो इस ट्रेन की ऑक्युपेंसी के कम होने का बड़ा कारण बताया गया है. ट्रेन की एग्जीक्यूटिव क्लास का किराया करीब दो हजार रुपये है. वहीं चेयर कार का किराया करीब एक हजार रुपये है.
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