बाबुओं ने टहलाया, मंगलसूत्र गिरवी रख शौचालय बनवाया
सुहाग की निशानी से तगड़ा इमोशनल अटैचमेंट रहता है. लेकिन सरकारी सब्सिडी के इंतजार में कब तक बैठी रहती.
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फोटो - thelallantop
'वो सात दिन' फिल्म देखे हो? उसमें क्लाइमेक्स सीन होता है. पद्मिनी कोल्हापुरी का मंगलसूत्र खींचने जाते हैं नसीरुद्दीन शाह, जो उनके पति के रोल में होते हैं. वो चिल्ला के रोक देती है. फिर उस पर बड़ा सा ज्ञान देती है. जिसका लब्बोलुआब ये होता है कि एक शादीशुदा औरत के लिए मंगलसूत्र से बड़ी कोई चीज नहीं. सुहाग की निशानी है भाई. और बिहार में अपने घर में शौचालय बनवाने के लिए एक औरत ने ये निशानी गिरवी रख दी. बिहार में रोहतास जिले में है विक्रमगंज. यहां एक गांव है बाहखन्ना. यहां फूलकुमारी रहती हैं. उम्र 30 साल. उदयपुर पंचायत से आस लगा रखी थी कि टट्टी बनवाने के लिए पैसे मिलेंगे. फार्म भरा और चक्कर लगाने शुरू कर दिए. उसके चक्कर बाकी देश के देहातों वाले चक्कर की तरह हो गए. माने दफ्तर जाओ. 'कल आना' का प्रवचन सुनकर चले आओ. फाइल आगे बढ़ ही नहीं रही थी. फूलकुमारी दौड़-भाग कर हैरान हो गई तो जी कर्रा करके फैसला कर लिया कि अब वो बिना सरकारी मदद के टॉयलेट बनवाकर रहेंगी. पहुंची सुनार के पास और अपने सब गहने गिरवी रख दिए. सबसे ज्यादा इमोशनल अटैचमेंट मंगलसूत्र से होता है. वो भी रख दिया. सब देकर रुपए मिले 9 हजार. खर्च आना था 12 हजार. तो कहा कि बाकी पैसा मजदूरी करके इकट्ठा करेगी. कहा कि गहने साले लाखों के घूरे पर पड़े रहें तो कउन काम के? जब घर में शौचालय तक नहीं बना है. अब देखो. 15 अगस्त तक बनके रहेगा. सरकार खुले में टट्टी जाने से रोक रही है. घर में टॉयलेट बनवाने पर कित्ता जोर और सब्सिडी दे रही है. बाबू लोग सरकारी प्लानिंग को अपने बड़े पेट में खींच बैठे हैं. उससे बड़ा कारनामा ये रहेगा कि अफसर लोग फूलकुमारी को ये हिम्मत दिखाने के लिए इनाम भी देंगे.
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