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बिहार सरकार की बड़ी कार्रवाई, पुल गिरने से ज्यादा इंजीनियर सस्पेंड कर दिए

बीते 17 दिनों में राज्य के अलग-अलग जिलों में कुल 12 पुल ढह गए. अब सरकार जांच समितियों की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई कर रही है.

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अररिया में 18 जून को बकरा नदी पर बना पुल गिरा था. (फोटो- पीटीआई)

बिहार में एक के बाद एक पुल ढहने की घटना (Bihar bridges collapse) के बाद सरकार ने कार्रवाई शुरू की है. इस कार्रवाई के पहले चरण में गाज गिरी है राज्य के इंजीनियर्स पर. राज्य सरकार ने अलग-अलग जिलों में लापरवाही बरतने के आरोपों में 16 इंजीनियर्स को सस्पेंड किया है. सबसे बड़ा एक्शन सिवान में हुआ है. यहां कुल 11 इंजीनियर्स सस्पेंड कर दिए गए. बीते दिनों जिन जिलों में पुल गिरे हैं, वहां से जांच कमिटी की रिपोर्ट मिलने के बाद सरकार ने ये कार्रवाई की है.

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पिछले कुछ दिनों से पुल गिरने के कारण बिहार सरकार की किरकिरी हो रही है. चौतरफा आलोचनाओं और सरकार के आत्ममंथन के बीच कहीं ना कहीं से लगातार पुल गिरने की खबरें आ रही हैं. 3 जुलाई को एक ही दिन में सिवान और सारण जिले में 5 पुल गिर गए. बीते 17 दिनों में राज्य के सिवान, सारण, मधुबनी, अररिया, पूर्वी चंपारण और किशनगंज जिलों में कुल 12 पुल ढह गए.

5 जुलाई को इंजीनियर्स को सस्पेंड करते हुए राज्य सरकार ने एक प्रेस रिलीज जारी की है. बताया कि 3-4 जुलाई को सिवान और सारण जिलों में 6 छोटे-बड़े पुल ढह गए. प्रेस रिलीज के मुताबिक, जांच में पाया गया कि निर्माण के दौरान इंजीनियर्स ने पुल को सुरक्षित रखे जाने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाया और ठीक तरीके से तकनीकी जांच नहीं की थी. इसलिए मामले की गंभीरता को लेते हुए सिवान में इन पुलों के निर्माण से जुड़े 11 इंजीनियर्स को सस्पेंड कर दिया गया.

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इसके अलावा, अररिया में पुल गिरने के मामले में भी 5 इंजीनियर्स को सस्पेंड किया गया है. यहां जिले के चीफ इंजीनियर की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय जांच कमिटी बनाई गई थी. कमिटी की रिपोर्ट पर ही ये कार्रवाई हुई. 18 जून को बकरा नदी पर बना पुल ढह गया था. ये पुल करीब 12 करोड़ रुपये की लागत से बना था.

बीते दिनों बिहार के इन जिलों में पुल गिरे

18 जून- अररिया में बकरा नदी पर बना पुल गिरा.
22 जून- सिवान में छाड़ी नदी पर बना करीब 40 साल पुराना पुल गिरा.
23 जून- पूर्वी चंपारण में करीब डेढ़ करोड़ की लागत से बना पुल गिरा.
27 जून- किशनगंज में मरिया नदी पर बना पुल गिरा.
28 जून- मधुबनी में भुतही बलान नदी पर 3 करोड़ की लागत से बना पुल गिरा.
1 जुलाई- मुजफ्फरपुर में अतरार घाट पर बना बांस का पुल बागमती नदी की तेज धार में बह गया.
3 जुलाई- सिवान के अलग-अलग इलाकों में 4 पुल गिरे. सारण में गंडकी नदी पर बना पुल भी उसी दिन ढह गया.
4 जुलाई- सारण में एक और पुल टूटकर गिर गया.

इन घटनाओं की जांच के लिए 2 जुलाई को राज्य सरकार ने अलग-अलग जिलों में हाई लेवल समितियों का गठन किया था. इन्हें पुल ढहने के कारणों का पता लगाने और जरूरी कदम उठाने के लिए सलाह देने की जिम्मेदारी दी गई थी. साथ ही, कमिटी को पुलों की नींव और उसके निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्री की गुणवत्ता चेक करने का निर्देश दिया गया था.

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राज्य के ग्रामीण कार्य मंत्री अशोक चौधरी ने कहा था कि कि ये कमिटी इन घटनाओं की जांच कर 2-3 दिनों में रिपोर्ट सौंपेगी. उन्होंने पुल गिरने को गंभीर मामला बताते हुए कहा था कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

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पूर्वी चंपारण की घटना को लेकर राज्य सरकार ने प्रेस रिलीज में बताया है कि FIR के आधार पर कार्रवाई की जा रही है. यहां भी इंजीनियर्स के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. वहीं, मधुबनी के मामले में भी जांच कराई गई है. बताया गया कि निर्माण कार्य में निगरानी में कमी बरतने के कारण जूनियर इंजीनियर के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. जांच कमिटी की अंतिम रिपोर्ट के बाद दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होगी.

वीडियो: दी लल्लनटॉप शो: बिहार में लगातार पुल गिरने का असल जिम्मेदार कौन?

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