बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) को लेकर एक बार फिर बड़ा बयान दिया है. नीतीश ने कहा कि नागरिकता कानून को लेकर बहस होनी चाहिए, बिहार में एनआरसी लागू होने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता.
नीतीश कुमार ने NRC के सवाल पर अब यू-टर्न क्यों ले लिया?
लेकिन नीतीश की ये नाराज़गी 'हाथी के दांत' क्यों दिखाई दे रही है?


# कहा क्या नीतीश ने
सीएम नीतीश कुमार ने CAA और NRC पर अपना पक्ष साफ करते हुए कहा- # हालांकि ये पहली बार नहीं हैहमें इस विषय पर कोई ऐतराज नहीं है. अगर किसी चीज़ को लेकर सबके मन में अलग-अलग राय है, तो इस विषय पर चर्चा होनी ही चाहिए. अगले सेशन में इस बात पर चर्चा हो जाए. लेकिन एक बात मैं ज़रूर कहना चाहता हूं कि NRC की जहां तक बात है, तो NRC का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. NRC आया कहां से? जब पहले ही केंद्र में राजीव गांधी की सरकार थी, तब असम के साथ जो समझौता हुआ था, तब NRC की बात हुई थी. देश के कन्टेक्स्ट में तो NRC की कभी कोई बात ही नहीं थी.
नीतीश कुमार एनआरसी को लेकर पहले भी बयान दे चुके हैं. नीतीश कुमार की पार्टी ने संसद में नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन किया था. नीतीश ने CAA के मुद्दे पर कहा कि इससे राज्य सरकारों का कोई लेना-देना नहीं है, जो भी करना है संसद को करना है. उन्होंने कहा कि इस पर जो भी बोलना है, 19 जनवरी के बाद बोलूंगा.
पार्टी के एक कार्यक्रम में राज्यसभा में संसदीय दल के नेता आरसीपी सिंह ने कहा कि नये नागरिकता क़ानून और NRC पर कुछ लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं. जब तक नीतीश कुमार हैं, किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जायेगा.
अब नीतीश कुमार ने कह दिया है कि बिहार विधानसभा में नागरिकता संशोधन कानून पर विशेष चर्चा होनी चाहिए. देखने वाली बात होगी कि NRC और CAA पर NDA के बाक़ी घटक दल नीतीश के इस तेवर से कितना और कैसे राब्ता रखेंगे.
# हालांकि एक बात और
वो ये कि अब NRC पर देश का मौका, माहौल और मूड भांपते हुए पीएम नरेंद्र मोदी भी तो यही कह रहे हैं कि हमने कभी NRC की बात कही ही नहीं. तो ऐसे में नीतीश कुमार ने कोई बहुत ख़िलाफ़ बात नहीं कह दी है. बाहर से देखने पर नीतीश अपने वोटर्स के मन की बात ही कहते दिखाई पड़ रहे हैं, जबकि असल में नीतीश केंद्र सरकार के मन की बात कह रहे हैं.
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