रूबी राय याद हैं? वही जिन्होंने पिछले साल बिहार बोर्ड की खूब छीछालेदर कराई थी. नंबरों के मामले में उन्होंने बिहार बोर्ड की 12वीं के एग्ज़ाम में टॉप किया था, लेकिन जब पत्रकार उनसे बात करने पहुंचे, तो वो एक सब्जेक्ट नाम भी ढंग से नहीं ले पाई थीं.
इस लड़की ने बिहार में 12वीं में टॉप किया है और इस पर कोई सवाल नहीं उठा सकता
CBSE स्टूडेंट्स के 99% वाली बहस पीछे छोड़ दीजिए.


6 जून को बिहार बोर्ड के 2018 के 12वीं के नतीजे आ गए और इस बार जिस लड़की ने टॉप किया है, उस पर कोई सवाल नहीं उठा पाएगा. बिहार बोर्ड की इस साल की टॉपर हैं कल्पना कुमारी. वही कल्पना कुमारी, जिनका 4 जून से हर कोई नाम ले रहा है, क्योंकि 99.99% नंबरों के साथ उन्होंने NEET के एग्ज़ाम में टॉप किया था.

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पिछले कई दिनों से लोगों के पास बात करने के लिए CBSE के नतीजे थे, जहां के स्टूडेंट्स 99-99% नंबर लाते हैं. 10वीं क्लास में तो इस बार चार-चार टॉपर निकले. चिंतकों ने छौंका लगाया कि देश नंबरों की अंधी दौड़ में भाग रहा है. अब CBSE छोड़कर बिहार बोर्ड के नतीजों पर शिफ्ट होने का टाइम आ गया है. पहले मोटी बात जान लीजिए, फिर तसल्ली से बताएंगे.
- साइंस कैटेगरी में 45% स्टूडेंट पास हुए हैं. - आर्ट्स कैटेगरी में 50% स्टूडेंट पास हुए हैं. - कॉमर्स कैटेगरी में 82% स्टूडेंट पास हुए हैं.
टॉपर के बारे में जैसा कि हम आपको बता ही चुके हैं कि वो कल्पना कुमारी हैं. कल्पना के बारे में आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं:
बिहार की कल्पना कुमारी ने पाए 99.99 पर्सेंटाइल, मगर कुछ लोग 96 प्रतिशत क्यूं कह रहे हैं?
इस साल बिहार बोर्ड की 12वीं की परीक्षा में 12,07,975 स्टूडेंट रजिस्टर हुए थे, जिनमें से एग्ज़ाम में 11,92,053 बैठे थे. 52.95% पास रहे और 47.05% फेल हो गए. साइंस कैटेगरी में कल्पना कुमारी (434) के सबसे ज़्यादा नंबर आए. कॉमर्स कैटेगरी में निधि सिन्हा (434) ने टॉप किया और आर्ट्स कैटेगरी में कुसुम कुमारी (424) ने टॉप किया.
रिज़ल्ट आने से पहले बोर्ड ने कहा था कि ज़रूरतमंद स्टूडेंट्स को 10% तक ग्रेस मार्क्स दिए जाएंगे. बिहार बोर्ड ने ऐसा फैसला पहली बार किया है कि ग्रेस नंबर देने के नियम तय किए गए. बोर्ड की तरफ से जारी गाइडलाइन के मुताबिक अगर किसी स्टूडेंट ने 75% नंबर हासिल किए हैं और वो किसी एक सब्जेक्ट में फेल हो गया है, तो उसे पास करने के लिए बोर्ड मैक्सिमम 10% ग्रेस नंबर देगा. बशर्ते उसने कोई और लाभ न लिया हो. साथ ही, किसी भाषा विषय में फेल होने पर कोई ग्रेस नहीं मिलेगा.

इसके अलावा बोर्ड ने पहले पांच टॉपर्स को सरकार की तरफ से 1500 रुपए प्रति महीने की स्कॉलरशिप अनाउंस की. इस स्कॉलरशिप की मियाद स्टूडेंट्स के 12वीं के बाद चुने गए कोर्स के आधार पर तय होगी.
पिछले साल बिहार बोर्ड का 12वीं का रिज़ल्ट बहुत खराब आया था. 65% स्टूडेंट्स यानी करीब 8 लाख से ज़्यादा स्टूडेंट्स फेल हो गए थे. रूबी राय नाम की लड़की टॉपर घोषित की गई थी, लेकिन एक पत्रकार के साथ इंटरव्यू के दौरान उसकी समझ और क्षमता पर सवाल खड़े हो गए. इंटरव्यू में पॉलिटिकल साइंस को सहीं ढंग से बोल भी नहीं पा रही थी. जांच के बाद पता चला कि वो फर्जी टॉपर है, जो अपने पिता के रसूख के बूते टॉपर बन गई थी.

रूबी राय
2017 की ऐसी घटनाओं से सबक लेते हुए बिहार बोर्ड इस साल बहुत ही फूंक-फूंककर कदम रख रहा था. परीक्षा समिति ने इस बार परीक्षाओं के मीडिया कवरेज पर रोक लगा दी थी. मेरिट लिस्ट तैयार होने के बाद टॉप-100 स्टूडेंट्स की कॉपियां दोबारा जांची गईं. साथ ही, रिज़ल्ट अनाउंस होने से पहले सबसे ज़्यादा नंबर पाने वाले छात्रों का बोर्ड की तरफ से टेस्ट और इंटरव्यू वगैरह लिया गया, ताकि ये सुनिश्चित किया जा सके कि वो असली टॉपर हैं और किसी फर्जीवाड़े के चलते ज़्यादा नंबर हासिल नहीं कर पाए हैं.
बिहार बोर्ड के 10वीं के नतीजे 20 जून को जारी होंगे. 12वीं के रिज़ल्ट की स्क्रूटनी 13 जून से शुरू होगी.






















