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व्हीलचेयर वाली MP प्रज्ञा ठाकुर ने किया गरबा, फिर कबड्डी-कबड्डी; विपक्ष ने पूछा- कोर्ट में पेशी कब है

कुछ समय पहले वॉलीबॉल खेलते दिखी थीं.

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भोपाल से बीजेपी एमपी प्रज्ञा ठाकुर के वायरल वीडियो ने विरोधियां को फिर से निशाना लगाने का मौका दे दिया है. विडियो में वो गरबा करते और कबड्डी खेलते दिख रही हैं.
मध्य प्रदेश के भोपाल से बीजेपी सांसद हैं प्रज्ञा सिंह ठाकुर (Pragya Thakur). अपने बयानों के चलते हमेशा सुर्खियों में रहती हैं. लेकिन इस बार कुछ कहने की वजह से नहीं, कुछ करने की वजह से चर्चा में हैं. दरअसल सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के कुछ नए वीडियो वायरल हैं. इनमें वो गरबा खेलती और कबड्डी में हाथ आजमाती दिख रही हैं. इन वीडियो के बहाने लोगों के साथ कांग्रेस को भी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर तंज कसने का एक और मौका मिल गया. कबड्डी-गरबा का वीडियो हुआ वायरल सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर मंगलवार 12 अक्टूबर को देर शाम एक दुर्गा पंडाल में पहुंची थीं. वहां उन्होंने देवी दर्शन किए. फिर वहां मौजूद महिलाओं ने बीजेपी सांसद से गरबा करने का निवेदन किया तो साध्वी प्रज्ञा खुद को रोक नहीं पाईं और गरबा करने लगीं. लगे हाथ वहां खेली जा रही कबड्डी में भी दो-दो हाथ आजमा लिए. प्रज्ञा सिंह ठाकुर की इन दोनों ऐक्टिविटी को वहां कई लोगों ने रिकॉर्ड किया होगा. उनमें से कुछ वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हैं. पहले गरबा खेलने का वीडियो वायरल हुआ. लोग उसे देख ही रहे थे कि दुर्गा पंडाल में उनके कबड्डी खेलने का वीडियो भी आ गया. लोग कहते नजर आए कि वैसे तो साध्वी प्रज्ञा व्हीलचेयर पर नजर आती हैं, लेकिन आज कबड्डी कैसे खेल रही हैं. विपक्षी दल कांग्रेस ने भी फौरन निशाना लगाया. यूथ कांग्रेस के प्रेसिडेंट श्रीनिवास बीवी ने ट्वीट करते हुए लिखा,
"इनकी NIA कोर्ट में अगली 'पेशी' कब है?"
वहीं मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट में लिखा,
"साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जी आपको स्वस्थ देखकर बड़ी प्रसन्नता होती है. आज आप गरबा खेलती नज़र आईं. बस जब जनता तकलीफ़ में होती है आपको पुकार रही होती है तो आपको बीमार देखते हैं, व्हीलचेयर पर देखते हैं या सहारे से चलते हुए देखते हैं तो बड़ा दुःख होता है. ईश्वर आपको सदैव स्वस्थ रखे."
  इससे पहले जुलाई के महीने में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर का बास्केटबॉल खेलते हुए वीडियो वायरल हुआ था. तब भी कांग्रेस ने सवाल उठाए थे कि व्हीलचेयर पर चलने वाली सांसद इतनी फुर्ती से बास्केटबॉल कैसे खेल लेती हैं. बास्केटबॉल वाले वीडियो को लेकर प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने सफाई दी थी. उन्होंने दैनिक भास्कर अखबार को बताया था,
"मुझे समतल जगह पर चलने में दिक्कत नहीं होती. लेकिन सीड़ियां या ऊबड़-खाबड़ जगह होने पर मुझे सहारे की जरूरत पड़ती है. मेरी यह तकलीफ भी कांग्रेस की देन है. खिलाड़ियों और राष्ट्रभक्तों का मनोबल बढ़ाने और विधर्मियों का विनाश करने लिए मैं हमेशा समर्पित हूं."
हालांकि नए वायरल वीडियो के संबंध में बीजेपी सांसद की तरफ से अब तक कोई सफाई नहीं आई है. माले गांव ब्लास्ट केस में है प्रज्ञा ठाकुर का नाम प्रज्ञा ठाकुर का नाम 2007 में राष्ट्रीय स्वयं संघ के प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में आया था. हालांकि कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था. अगले ही साल यानी 2008 में प्रज्ञा ठाकुर को मालेगांव ब्लास्ट केस में गिरफ्तार किया गया. 29 सितंबर 2008 में मालेगांव धमाके में 7 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हुए थे. सरकार ने मामले की जांच एटीएस को सौंपी थी. 24 अक्टूबर, 2008 को इस मामले में स्वामी असीमानंद, कर्नल पुरोहित और प्रज्ञा सिंह को गिरफ्तार किया गया था. 3 आरोपी फरार दिखाए गए थे. बाद में यह जांच एनआईए को सौंप दी गई थी. अप्रैल 2017 में साध्वी प्रज्ञा को 9 साल कैद में रहने के बाद सशर्त जमानत दी गई थी. जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने खुद को यातना देने की बात मीडिया में कही थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि मुंबई एटीएस के प्रमुख रहे हेमंत करकरे ने कैद में रहने के दौरान उन पर सबसे ज्यादा अत्याचार किए हैं. उन्होंने तत्कालीन गृहमंत्री पी चिदंबरम पर भी आरोप लगाया था कि हिंदू आतंकवाद का नाम देकर उन्हें झूठे केस में फंसाया गया है. जेल से बाहर आने के बाद से प्रज्ञा ठाकुर अक्सर व्हीलचेयर पर नजर आती हैं. वो कई बार अपनी बीमारी का जिक्र कर चुकी हैं. उनके अनुसार जेल में रहते हुए उन्हें ब्रेस्ट कैंसर भी हो गया था. उन्होंने इलाज के लिए जमानत का आवेदन भी दिया था, जिसे बाद में कोर्ट ने नामंजूर कर दिया था. 2019 में सांसद चुने जाने के बाद उन्होंने एनआईए कोर्ट में होने वाली पेशी को भी बीमारी के आधार पर टाला है. जून 2019 में प्रज्ञा ठाकुर एक हफ्ते में दो बार एनआईए कोर्ट की कोर्ट में नहीं पहुंचीं. कारण बताया कि वो बीमार हैं. इस पर कोर्ट ने भी सख्त नाराजगी जताई थी. हालांकि कोर्ट ने सांसद होने के नाते उन्हें संसद सत्र के दौरान पेशी से राहत दे दी थी.

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