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किसानों की भीड़ को उकसाने के आरोपी दीप सिद्धू का BJP से क्या कनेक्शन है?

अपनी सफ़ाई में दीप सिद्धू ने क्या कहा?

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नरेंद्र मोदी और सनी देओल के साथ दीप सिद्धू (दाहिने) और लाल क़िले पर खालसा ध्वज लहराता प्रदर्शनकारी (बाएं - PTI)
दीप सिद्धू. एक्टर और ऐक्टिविस्ट. इनके नाम पर बवाल उठ रहा है. दीप सिद्धू पर आरोप हैं कि इन्होंने और इनके सहयोगियों ने 26 जनवरी को दिल्ली के लाल क़िले पर खालसा ध्वज फहरा दिया. किसान नेताओं ने भी दीप सिद्धू पर आरोप लगाए हैं. कहा है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों को भड़काया. लेकिन अपने बचाव में दीप ने कहा है कि उन्होंने बस निशान साहिब का झंडा लाल क़िले पर फहराया है, प्रदर्शन करने को लोकतांत्रिक अधिकार बताया है. दीप सिद्धू ने कहा है कि जहां तक भारतीय झंडे की बात है, उसे हटाया नहीं गया.
26 जनवरी का दिन. राजपथ पर गणतंत्र दिवस का जश्न, तो वहीं दिल्ली-एनसीआर के दूसरे इलाक़ों से किसान प्रदर्शन के दौरान हिंसक झड़पों की ख़बरें. इसी बीच दिल्ली के लाल क़िले से ख़बर आयी कि कुछ प्रदर्शनकारी लाल क़िले में घुस गए. फ़ोटो और वीडियो आने लगे. प्रदर्शनकारी लाल क़िले पर झंडा फहराते देखे गए. फिर लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा शुरू किया कि ये तो दीप सिद्धू है. दीप की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सांसद और एक्टर सनी देओल के साथ दीप की तस्वीरें शेयर की जाने लगीं. भाजपा पर आंदोलनकारियों को भड़काने और लाल क़िले पर झंडा फहराने जैसी घटना की साज़िश रचने के आरोप लगे.
इंडिया टुडे से बातचीत में स्वराज इंडिया के प्रमुख योगेन्द्र यादव ने कहा है कि दीप सिद्धू और गैंगस्टर से नेता बने लाखा सिधाना ने आंदोलनकारियों को भड़काया. उन्होंने इस बात की जांच की मांग की कि दीप सिद्धू माइक वग़ैरह लेकर अपने समर्थकों के साथ लाल क़िले कैसे पहुंचे? किस लाखा सिधाना की बात कर रहे हैं योगेन्द्र यादव? पूरा नाम है लखबीर सिंह सिधाना. ख़बरों के मुताबिक़ पहले गैंगस्टर थे. अब नेता बन गए हैं. मालवा यूथ फ़ेडरेशन के प्रेसिडेंट हैं.  25 जनवरी को क्या प्लानिंग हुई थी? इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि इस पूरी घटना से पहले 25 जनवरी की रात को दीप और सिधाना ने सिंघु बॉर्डर पर बने संयुक्त किसान मोर्चा का अधिग्रहण कर लिया. और साथ ही उन्होंने अपने समर्थकों से रिंग रोड अख़्तियार करने की बात कही. यानी उस रास्ते पर जाने की बात, जिसे लेकर दिल्ली पुलिस और संयुक्त किसान मोर्चे के बीच ट्रैक्टर मार्च के रूट को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ था.

फिर 26 तारीख़ की घटना सामने आयी. लाल क़िले की घटना के बाद दीप सिद्धू ने एक वीडियो रिलीज़ किया. इस वीडियो में दीप सिद्धू ने कहा कि उन्होंने अपने नेताओं को वॉर्निंग दी थी कि उन्होंने हमारे युवाओं की भावनाओं के खिलाफ़ निर्णय लिया है. जब संयुक्त किसान मोर्चा से कहा गया कि वो ऐसा डिसीजन लें, जो सबको मंज़ूर हो, उन्होंने इस मांग को रिजेक्ट कर दिया, ऐसा दीप सिद्धू ने कहा. उन्होंने कहा कि उन्होंने किसी को नहीं भड़काया. ‘भला मैं कैसे इतने लोगों को भड़का सकता हूं. आपको मेरा एक भी वीडियो नहीं मिलेगा, जहां मैं लोगों को लाल क़िले की तरफ़ ले जा रहा हूं.' साथ ही ये भी कहा कि उन्होंने भावनाओं में बहकर निशान साहिब और किसान यूनियन का झंडा लाल क़िले पर फहरा दिया था.
सवाल उठता है कि जब सिंघु बॉर्डर पर ही संयुक्त किसान मोर्चा के मंच से परेड का रूट अलग करने की बात हो रही थी, उस समय वहां मौजूद दूसरे किसान नेताओं ने क्यों विरोध नहीं किया? ख़बरें बताती हैं कि किसान नेता इस समय तक अपना भाषण ख़त्म कर चुके थे. और भीड़ के चले जाने के बाद कुछ लोगों ने स्टेज पकड़ लिया और नारे लगाने लगे. नारे थे ‘हमारा रूट, रिंग रोड. परेड रूट, रिंग रोड.’
वहां मौजूद लेखक सुखप्रीत सिंह उड़ोक ने भी एक्सप्रेस से बातचीत में इसकी पुष्टि की है. कहा है कि पहले किसान नेताओं ने कहा कि वो 26 तारीख़ को संसद जायेंगे. फिर उन्होंने प्लान में तब्दीली की. फिर कहा है कि वो बस दिल्ली में एंट्री करेंगे. फिर कहा कि वो रिंग रोड जायेंगे. और आख़िर में दिल्ली पुलिस के साथ हुए समझौते के मुताबिक़ उन्होंने तय रूट पर ही आंदोलन करने का ऐलान किया. इससे वहां मौजूद कुछ युवा उत्तेजित हो गए. उन्हें शांत कराने का प्रयास किया गया और कहा गया कि अगर वो रिंग रोड का रास्ता अख़्तियार करना चाहते हैं तो किसान मज़दूर संघर्ष कमिटी का साथ पकड़ें. बाक़ी संयुक्त किसान मोर्चे के साथ रहें.
इसके पहले भी जांच एजेंसियों ने एक विवादित लेटर आने के बाद सिख फ़ॉर जस्टिस नामक संगठन के खिलाफ़ केस भी दर्ज किया था. उस समय दीप और उनके भाई मनदीप सिंह को NIA ने पूछताछ के लिए नोटिस भेजा था.  कौन हैं दीप सिद्धू? 1984 में पंजाब के मुक्तसर जिले में दीप सिद्धू का जन्म हुआ. लॉ की पढ़ाई की. बार के सदस्य भी थे. बहुत दिन तक वकालत की. ख़बरें बताती हैं कि बहुत दिनों तक सहारा इंडिया परिवार में क़ानूनी सलाहकार पद पर कार्यरत रहे. बाद में ब्रिटिश लॉ फ़र्म हैमंड्स के साथ कुछ समय तक काम किया. फिर आए बालाजी टेलीफ़िल्म में. ख़बरों के मुताबिक़, एकता कपूर ने कुछ समय तक दीप सिद्धू से कहा था कि वो एक्टिंग में हाथ आज़माएं. बीच-बीच में मॉडलिंग वग़ैरह तो करते ही थे. किंगफ़िशर का मॉडल हंट अवार्ड भी जीत गए.
Deep Sidhu दीप सिद्धू

फिर साल आया 2015. दीप सिद्धू की पहली पंजाबी मूवी रिलीज़ हुई. नाम रमता जोगी. पहली बार दीप सिद्धू का नाम सुना गया. फिर आया साल 2018 और फ़िल्म आयी जोरा दस नंबरिया. दीप सिद्धू का नाम जम गया. युवाओं में पहचान बनी. और ठीक एक साल बाद यानी 2019 में देखे गए सनी देओल के साथ चुनाव प्रचार में. दीप सिद्धू का भाजपा से क्या लिंक?  सनी देओल ने 2019 के लोकसभा चुनाव में गुरदासपुर की लोकसभा सीट से पर्चा भरा. कैम्पेन में दीप सिद्धू सनी देओल के साथ कई मोर्चों पर देखे गए. फिर 25 सितम्बर 2020 को देखे गए दिल्ली के शंभू बॉर्डर पर. इंग्लिश बोलते किसान का वीडियो वायरल हुआ था. वीडियो देखकर पता चला कि ये दीप सिद्धू है. तब भी सनी देओल के साथ वाली फ़ोटो निकाल ली गयी. लेकिन पत्रकार बरखा दत्त से बातचीत में दीप ने कहा कि वो बीजेपी सपोर्टर नहीं हैं, और बार-बार कहा कि वो किसानों के साथ हैं. 
26 जनवरी का बवाल सामने आने का बाद सनी देओल ने ट्वीट कर दिया है. कहा है कि
”आज लाल क़िले पर जो हुआ उसे देख कर मन बहुत दुखी हुआ है, मैं पहले भी, 6 December को, Twitter के माध्यम से यह साफ कर चुका हूँ कि मेरा या मेरे परिवार का दीप सिद्धू के साथ कोई संबंध नही है. जय हिन्द”
लेकिन जनता एक और वीडियो निकालकर ले आयी है. उसमें किसी पत्रकार से बात करते हुए सनी देओल कह रहे हैं कि वो दीप को कई सालों से जानते रहे हैं. और उनके छोटे भाई की तरह हैं. बहुत सारी वायरल चीज़ें हैं. बहुत सारे दावे हैं. और बचाव के बहुत सारे बहाने. लेकिन सचाई क्या है, इस पर अभी बहुत सारी बहस शायद अभी होनी ही है.

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