अपनी फेसबुक वॉल पर राघवेंद्र विक्रम सिंह ने लिखा है-
'अजब रिवाज बन गया है. मुस्लिम मोहल्लों में जबरदस्ती जुलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ. क्यों भाई वे पाकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली के खेलम में हुआ था. फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए....'

राघवेंद्र विक्रम सिंह की फेसबुक पोस्ट मय एडिट हिस्ट्री
राघवेंद्र अपनी फेसबुक पोस्ट में बरेली के खेलम गांव में पिछले साल जुलाई में हुई हिंसा का जिक्र कर रहे थे. उस समय कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ कांवड़ियों के मुसलिम बहुल खेलम गांव के बाहर तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की वजह से तनाव की स्थिति पैदा हो गई थी. यहां दो समुदायों के बीच हुए पथराव के बाद दो पुलिस जवानों सहित कुल आठ लोग घायल हुए थे.
राघवेंद्र की इस पोस्ट को कासगंज हिंसा से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि राघवेंद्र ने अपनी पोस्ट में सीधे तौर पर कासगंज का जिक्र नहीं किया है. इस बयान के वायरल होने के बाद राघवेंद्र ने अपनी फेसबुक पोस्ट को एडिट कर दिया है. अब इस बयान की जगह 26 जनवरी का महत्व बताती एक पोस्ट चस्पा कर दी गई है. हालांकि एडिट हिस्ट्री में राघवेंद्र का पिछला बयान देखा जा सकता है.
सेना से प्रशासनिक सेवा में आए राघवेंद्र अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं. उनकी फेसबुक प्रोफाइल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वो उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेव में आने से पहले सेना में अफसर के तौर पर जम्मू-कश्मीर, रांची और हैदराबाद में तैनात रहे हैं.

केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह के बयान पर राघवेंद्र विक्रम सिंह का फेसबुक पोस्ट
मानव संसाधन मंत्री सत्यपाल सिंह ने डार्विन के क्रमिक विकास के सिद्धांत को ख़ारिज करते हुए कहा था कि हमारे किसी भी पूर्वज ने लिखित या मौखिक रूप में बंदर को इंसान में बदलने का ज़िक्र नहीं किया था. इस चीज पर तंज कसते हुए राघवेंद्र सिंह ने 22 जनवरी की अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा है,
''हमारे गांव के पंधारीलाल पूँछते थे - अगर आदमी बन्दर से बना है तो ये बन्दरवे आदमी क्यों नही हो जाते ? आज वे खुश होंगे उन्हें एक Cabinet मंत्री का समर्थन जो मिल गया है और पंधारीलाल भी तो cabinet मंत्री हो सकते थे ... !"इसी तरह से फिल्म पद्मावत पर करणी सेना के बवाल पर उन्होंने 22 जनवरी को अपनी फेसबुक पर लिखा-
"क्या आज जैसे माहौल में कोई 'मुगले आज़म' बनाने की हिम्मत कर पाता?"इस पोस्ट के कुछ ही घंटो के बाद उन्होंने लिखा
"तो अब पता लग गया कि यह ओढ़ा हुआ हिंदुत्व था."

कासगंज तनाव पर बेबाक बयान देने वाले राघवेंद्र विक्रम सिंह नरेंद्र मोदी के प्रशंसकों में से हैं. गुजरात चुनाव के दौरान मणिशंकर अय्यर ने नरेंद्र मोदी को तथाकथित तौर पर 'नीच' कहा था. इस घटना के बारे में राघवेंद्र लिखते हैं-
'जब कोई 'चायवाला' कोई 'नीच' राष्ट्र नियंता बनेगा तो भयभीत हो रहे स्थापित स्वार्थी प्रभुत्व वर्गो में हादसे तो होंगे ही ..! (यह पोस्ट PM के विरोधियों को उनकी औकात बताने के लिए है न कि PM के असम्मान के लिए. यह मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ )'
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