अमेरिकी रिसर्च फर्म हिंडनबर्ग की रिपोर्ट (Hindenburg Report) के बाद से भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) को जो झटका लगा है, उससे हाल फिलहाल उन्हें राहत मिलती नजर नहीं आ रही है. अडानी ग्रुप की ओर से भले ही हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को निराधार बताया गया है, लेकिन बाज़ार का भरोसा इतनी जल्दी लौटेगा, ऐसा लग नहीं रहा है. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) ने अडानी ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड्स के बदले मार्जिन लोन देने पर रोक लगा दी है.
यूरोप के इस बड़े बैंक ने अडानी ग्रुप के बॉन्ड्स की वैल्यू जीरो कर दी, दिक्कत बढ़ने वाली है?
गौतम अडानी फोर्ब्स की अमीरों वाली लिस्ट में 15वें नंबर पर पहुंच गए हैं.


क्रेडिट सुइस (Credit Suisse) एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म है. इसका हेडक्वार्टर स्विट्ज़रलैंड में है. पहले ये बैंक अडानी ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड्स के बदले अपने क्लाइंट्स को लोन देता था, लेकिन अब ये ऐसा नहीं करेगा.
बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप की कंपनियों के बॉन्ड्स के लिए क्रेडिट सुइस की इस रोक के बाद अडानी ग्रुप के सभी 10 लिस्टेड स्टॉक एक रिपोर्ट के बाद तेजी से गिर गए. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रेडिट सुइस ने अडानी पोर्ट्स और अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी इलेक्ट्रिसिटी मुंबई लिमिटेड द्वारा बेचे गए बॉन्ड्स के लिए जीरो लेंडिंग (उधार) वैल्यू निर्धारित की है.
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जब कोई प्राइवेट बैंक किसी कंपनी के बॉन्ड्स की लेंडिंग (उधार) वैल्यू जीरो कर देता है, तो संबंधित कंपनी को कर्ज जारी रखने के लिए नकद के साथ टॉपअप करना पड़ता है. कंपनी को दूसरे विकल्प के तहत दूसरे कोलैटरल मुहैया कराने होते हैं. अगर वो कंपनी ऐसा नहीं कर पाती है, तो कंपनी की सिक्योरिटीज को बेचकर भरपाई की जा सकती है.
लेकिन सभी यूरोपियन बैंकों ने ऐसा नहीं किया है. दो यूरोपीय प्राइवेट बैंकों ने अब तक अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है. एक इन्वेस्टमेंट फर्म ने अडानी पोर्ट्स के डॉलर बॉन्ड के एवज में 75% से 80% के बीच उधार देने की पेशकश की है.
बता दें कि बुधवार, 1 फरवरी को गौतम अडानी की नेटवर्थ में एक बार फिर बड़ी गिरावट आई और वे फोर्ब्स की अरबपतियों वाली लिस्ट में खिसककर सीधे 15वें नंबर पर पहुंच गए. वहीं अडानी एंटरप्राइेजज के शेयर करीब 25 फीसदी तक गिर गए. ये तब हुआ, जब एक दिन पहले ही अडानी एंटरप्राइेजज के 20 हजार करोड़ का FPO पूरी तरह बिक गया था.
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