भारत में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) बने हुए एक महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है. देश के कई हिस्सों में लोग इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं. अब बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना का भी इस एक्ट पर रिएक्शन सामने आ गया है. हसीना ने कहा है कि उन्हें ये समझ नहीं आता कि CAA को पास करने का मकसद क्या था. हालांकि उन्होंने ये बात भी कही कि ये भारत का आंतरिक मामला है.
मोदी के बांग्लादेश दौरे के पहले शेख हसीना ने CAA को 'बेमतलब का' बता दिया
CAA और NRC पर हसीना ने दिया रिएक्शन.


शेख हसीना ने पिछले हफ्ते UAE की राजधानी अबू धाबी में 'गल्फ न्यूज़' को इंटरव्यू दिया था. इसमें उन्होंने कहा :
'हमें ये समझ नहीं आ रहा कि भारत सरकार ने ऐसा क्यों किया? इसकी कोई जरूरत नहीं थी. हालांकि ये भारत का आंतरिक मामला है. बांग्लादेश ने हमेशा ये कहा है कि CAA और NRC भारत का आंतरिक मामला है. दूसरी तरफ भारत सरकार ने भी हर बार यही बात कही कि NRC उनका आंतरिक मामला है. पीएम नरेंद्र मोदी ने भी पिछले साल अक्टूबर में मेरे दिल्ली दौरे के वक्त मुझसे व्यक्तिगत तौर पर यही बात कही थी.'
हसीना ने रिवर्स माइग्रेशन के मुद्दे पर भी बात की. उन्होंने कहा, 'नहीं, भारत से कोई रिवर्स माइग्रेशन नहीं हुआ है, लेकिन भारत के अंदर ही लोग बहुत सारी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं. फिर भी ये भारत का आंतरिक मामला है.'
इसके साथ ही हसीना ने ये भी कहा है कि इस वक्त भारत और बांग्लादेश के रिश्ते सबसे अच्छे मुकाम पर है. पिछले साल अक्टूबर में शेख हसीना इंडिया इकोनॉमिक समिट ऑफ वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम को अटेंड करने के लिए दिल्ली आई थीं. यहां पीएम मोदी से उनकी मुलाकात हुई थी. हसीना ने इस मीटिंग को लेकर कहा कि पीएम मोदी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि असम में लागू हुए NRC से बांग्लादेश को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.
पीएम मोदी बांग्लादेश जा सकते हैं
शेख हसीना का बयान ऐसे वक्त पर आया है, जब पीएम मोदी बांग्लादेश का दौरा कर सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी बांग्लादेश के पूर्व पीएम शेख मुजीबुर्रहमान की 100वीं जयंती पर बांग्लादेश जा सकते हैं. ये इवेंट 17 मार्च को है. इसमें पीएम मोदी के अलावा पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और कांग्रेस चीफ सोनिया गांधी भी शामिल हो सकती हैं.
बांग्लादेश CAA को लेकर क्या सोचता है?
बांग्लादेश के कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में रहने वाले मुस्लिम अपनी नागरिकता साबित करने में अगर नाकाम रहे, तो फिर वो बांग्लादेश में शरण लेंगे. पिछले महीने बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमेन और गृहमंत्री असदुज्जमान खान ने भारत के दौरे को रद्द कर दिया था. ठीक CAA के पास होने के दूसरे दिन.
मोमेन ने हालांकि यात्रा रद्द करने की वजह अपने यहां विजय दिवस में हिस्सा लेना बताया था. लेकिन PTI ने सूत्रों के हवाले से खबर दी थी कि CAB (सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल) की वजह से यात्रा कैंसिल की गई है. यात्रा कैंसिल करने से पहले 11 दिसंबर को अब्दुल मोमेन ने CAB और इससे जुड़े बांग्लादेश के जिक्र पर 'ढाका ट्रिब्यून' से कहा था :
बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार को लेकर वो (भारत सरकार) जो कह रही है, वो ग़ैरज़रूरी और ग़लत है. अगर अमित शाह कुछ महीने बांग्लादेश में रहें, तो वो हमारी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल देख पाएंगे. हम बांग्लादेश में किसी को उसके धर्म के आधार पर जज़ नहीं करते. यहां सारे लोग बांग्लादेश के नागरिक हैं. उनके (भारत) अपने देश में कई मुश्किलें हैं. उन्हें लड़ने दीजिए आपस में. उससे हमें कोई फ़र्क नहीं पड़ता. एक दोस्त के तौर पर हम उम्मीद करते हैं कि भारत ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिससे हमारी दोस्ती पर बुरा असर पड़े.
बाद में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने सफाई दी थी. कहा था कि बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना की सरकार के तहत अल्पसंख्यकों के साथ अभी कोई धार्मिक उत्पीड़न नहीं हो रहा है, ऐसा 'पुरानी सरकारों' और 'मिलिट्री रूल' के वक्त होता था.
बांग्लादेश का CAA और NRC को लेकर क्या सोचना है, ये और भी अच्छे से जानने के लिए यहां क्लिक करें.
वीडियो देखें:





















