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सरकार बनते ही मोहम्मद यूनुस के 'सारे जुर्म' माफ! 13 सहयोगियों से भी हटे केस

Bangladesh Crisis: अंतरिम सरकार के प्रमुख और नोबेल पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर Muhammad Yunus को 'रिश्वत केस' में एंटी करप्शन कमीशन ने बरी कर दिया है. इससे पहले उन्हें लेबर लॉ के उल्लंघन के मामले में भी बरी कर दिया गया था.

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मोहम्मद यूनुस (फाइल फोटो- गेट्टी)

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का गठन हो चुका है. सरकार गठन के कुछ दिनों बाद से ही अंतरिम सरकार ने फैसले लेने भी शुरू कर दिए हैं. शुरुआती फैसलों की कड़ी में सरकार प्रमुख मोहम्मद यूनुस पर चल रहे करप्शन के केस को एंटी करप्शन कमीशन ने वापस ले लिया है.

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बांग्लादेशी अख़बार 'द डेली स्टार' की खबर के मुताबिक ढाका की स्पेशल कोर्ट-4 ने प्रोफेसर यूनुस, अंतरिम सरकार में स्वास्थ्य सलाहकार नूरजहां बेगम और 12  अन्य लोगों को भ्रष्टाचार के मामले में बरी कर दिया है. बांग्लादेश के एंटी करप्शन कमीशन ने अदालत में बांग्लादेश की दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 494 के तहत मामले को वापस लेने की अर्ज़ी लगाई थी. अदालत ने इस अर्ज़ी को स्वीकार कर लिया है.

अंतरिम सरकार के शपथ ग्रहण से एक दिन पहले 8 अगस्त को ‘ग्रामीण टेलीकॉम’ के चेयरमैन प्रोफेसर यूनुस और डायरेक्टर्स अशरफुल हसन, एम शाहजहां और नूरजहां बेगम को उन पर चल रहे  ‘लेबर लॉ उल्लंघन' के मामले में भी बरी कर दिया गया था. इस मामले में उन्हें 6 महीने की जेल के साथ 30 हजार टका जुर्माना भी लगाया गया था. 12 जून को प्रोफेसर यूनुस, नूरजहां और 12 अन्य को ग्रामीण टेलीकॉम वर्कर्स प्रॉफिट पार्टिसिपेशन फंड के लगभग 25.22 करोड़ टका के दुरुपयोग को लेकर दायर एसीसी मामले में दोषी ठहराया गया था. अदालत को गवाहों के बयान भी दर्ज करने थे. पर अब ये मामला बंद हो चुका है. शेख हसीना के कुर्सी छोड़ने के बाद से मोहम्मद यूनुस पर चल रहा दूसरा केस वापस लिया जा चुका है. उनके अलावा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की नेता खालिदा ज़िया पर भी चल रहे मुक़दमे को वापस लेकर उन्हें रिहाई दे दी गई थी.

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इससे पहले शनिवार को बांग्लादेश की सुप्रीम कोट के चीफ जस्टिस ओबैदुल हसन ने अपने द से इस्तीफा दे दिया था. प्रोटेस्ट करते हुए स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट का घेराव कर उनके इस्तीफे की मांग की थी जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया. प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस के बनाए ग्रामीण बैंक की गतिविधियों पर 2011 में जांच शुरू हुई थी. इस जांच के बाद यूनुस को ग्रामीण बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर के पद से हटा दिया गया था. उनपर आरोप था कि उन्होंने बांग्लादेश के रिटायरमेंट नियमों का उल्लंघन किया है. इसके बाद मोहम्मद यूनुस पर दर्जनों केस हुए.

                                                             

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