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PFI बैन पर आए विपक्षी नेताओं के बयान, ओवैसी ने गलत बताया, बाकी बोले- RSS को भी बैन करो

केंद्र सरकार ने 27 सितंबर को PFI पर बैन लगा दिया. विपक्षी नेताओं ने कहा कि RSS भी सांप्रदायिकता फैलाता है, उसे भी बैन करना चाहिए.

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ओवैसी ने PFI के बैन पर आपत्ति जताई है. (फोटो - PTI/ANI)

केंद्र सरकार ने 27 सितंबर को इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया (PFI) को पांच साल के लिए बैन कर दिया. गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक़, PFI के साथ उसके अन्य 8 सहयोगी संगठनों पर भी बैन लगाया गया है. इसके बाद से ही मुख्यधारा मीडिया और सोशल मीडिया पर बहसें चल रही हैं. एक तरफ़, सरकार के पक्षकार क़दम को क्रांतिकारी बता रहे हैं. वहीं, विपक्षी पार्टियां कह रही हैं कि अगर कट्टरपंथ के नाम पर PFI को बैन किया है, तो दक्षिणपंथी संगठन RSS को भी बैन किया जाना चाहिए. 

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RLD प्रमुख लालू यादव ने भी ठीक यही बात कही. ट्वीट किया,

"PFI की तरह जितने भी नफ़रत और द्वेष फैलाने वाले संगठन हैं, सभी पर प्रतिबंध लगाना चाहिए. जिसमें RSS भी शामिल है. सबसे पहले RSS को बैन करिए. ये उससे भी बदतर संगठन है.

RSS पर दो बार पहले भी बैन लग चुका है. सनद रहे, सबसे पहले RSS पर प्रतिबंध लौह पुरुष सरदार पटेल ने लगाया था."

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केंद्र सरकार के इस क़दम पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया. कहा,

"मैंने हमेशा PFI के अप्रोच का विरोध किया है और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का ही समर्थन किया है, लेकिन PFI पर इस प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता. अपराध करने वाले कुछ लोगों की वजह से पूरे संगठन को बैन नहीं किया जाना चाहिए. SC ने भी ये कहा है कि किसी संगठन के साथ जुड़ाव मात्र किसी को दोषी ठहराने के लिए काफ़ी नहीं है.

इस तरह का कड़ा प्रतिबंध ख़तरनाक है क्योंकि ये हर उस मुसलमान पर प्रतिबंध है, जो अपने मन की बात कहना चाहता है. जिस तरह से भारत फासीवाद के क़रीब पहुंच रहा है, अब हर मुस्लिम युवा को PFI की तरह ही UAPA के तहत गिरफ़्तार किया जाएगा. मैंने UAPA का विरोध किया है और हमेशा विरोध करूंगा. ये स्वतंत्रता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, जो संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है.

PFI पर तो प्रतिबंध लगा, लेकिन ख्वाजा अजमेरी बम धमाकों के दोषियों से जुड़े संगठन पर क्यों नहीं है? सरकार ने दक्षिणपंथी बहुसंख्यक संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया है?"

केरल के कांग्रेस सांसद ने यही कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया एक जैसे हैं. और, RSS 'हिंदू सांप्रदायिकता' फैलाता है, इसलिए उस पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग की. के सुरेश ने कहा,

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"हम RSS पर भी प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं. PFI पर प्रतिबंध कोई उपाय नहीं है क्योंकि RSS भी पूरे देश में हिंदू सांप्रदायिकता फैला रहा है. इसलिए RSS और PFI दोनों बराबर हैं. सरकार को दोनों पर प्रतिबंध लगाना चाहिए. केवल PFI ही क्यों?"

वामपंथी पार्टी CPI(M) ने भी यही बात पूछी. CPI(M) पॉलिट ब्यूरो ने आधिकारिक बयान भी जारी किया. पूछा,

"सभी प्रकार की सांप्रदायिकता ख़तरनाक होती है. किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने से उसकी विचारधारा ख़त्म नहीं हो जाएगी. वो एक नए नाम या पहचान के साथ लौटेंगे. अगर आप सभी सांप्रदायिक संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के तर्क पर चलते हैं, तो RSS सबसे पहले आता है. क्या इसे भी प्रतिबंधित किया जाएगा?"

PFI के अलावा रिहैब इंडिया फाउंडेशन (RIF), कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया (CFI), ऑल इंडिया इमाम्स काउंसिल (AIIC), नेशनल कन्फिडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (NCHRO), नेशनल वीमन्स फ्रंट (NWF), जूनियर फ्रंट (JF), एम्पावर इंडिया फाउंडेशन (EIF) और रिहैब फाउंडेशन (केरल) पर भी प्रतिबंध लगाया गया है.

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