The Lallantop

ईरान युद्ध से दुनिया का बेड़ा गर्क होना तय? गीता गोपीनाथ ने 'सूरमा' देशों का सच खोल दिया

इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ का कहना है कि ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतें बढ़ने से इस साल दुनियाभर की अर्थव्यवस्थाओं को मंदी का सामना करना पड़ रहा है.

Advertisement
post-main-image
कच्चे तेल में तेजी से कई देशों की इकोनॉमीज पर खतरा मंडरा रहा है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

दुनिया भर की सरकारों की माली हालत ऐसी नहीं बची है कि वे इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के चलते तेल की कीमतों में आई तेजी से आसानी से निपट सकें. यह चेतावनी इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ दी है. गीता गोपीनाथ फिलहाल हार्वर्ड विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र की प्रोफेसर हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग को दिए एक इंटरव्यू में गीता गोपीनाथ ने कहा कि अभी तो युद्ध शुरू हुए दो हफ्ते से भी कम वक्त बीता है, लेकिन इसका असर पूरी दुनिया में दिख रहा है. उनका कहना है कि ईरान युद्ध के चलते तेल की कीमतें बढ़ने से इस साल विश्व की कई अर्थव्यवस्थाओं को मंदी का सामना करना पड़ रहा है. 

उन्होंने कहा कि अब इस साल कच्चे तेल का औसत भाव 75 डॉलर प्रति बैरल रहने की ज्यादा संभावना है. इससे पहले कई अनुमानों में इस साल कच्चे तेल का औसत भाव 65 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया गया था. गोपीनाथ ने कहा कि कच्चे तेल के भाव में तेजी के चलते दुनिया भर में महंगाई आधा पर्सेंट बढ़ाने के लिए पर्याप्त है.

Advertisement

ये भी पढ़ें: ईरान के हमले में तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए, ट्रंप ने युद्ध खत्म होने का बता दिया टाइम

उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया की आर्थिक हालत कई जानकारों के अनुमान से भी ज्यादा नाजुक है. साल 2025 में राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. ये देश टैरिफ के झटकों को झेल रहे हैं. अब मामला गंभीर नजर आ रहा है. गीता गोपीनाथ ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं. मंगलवार को कच्चे तेल का भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था. 

ये भी पढ़ें: पहली नौकरी मिलते ही कीजिए ये 3 काम, जिंदगी बन जाएगी, कभी हाथ नहीं फैलाने पड़ेंगे

Advertisement

जनवरी में आईएमएफ ने दुनिया की आर्थिक विकास दर के अपने अनुमान को बढ़ाकर 3.3 पर्सेंट कर दिया. अक्टूबर में आईएमएफ ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ रेट 3.1 पर्सेंट रहने का अनुमान जताया था. अगले महीने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए आर्थिक विकास दर का ताजा अनुमान जारी करेगा.

इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल फाइनेंस (Institute of International Finance) की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दुनियाभर के देशों पर कर्ज का बोझ 348 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. यह कोरोना संकट के बाद से सबसे तेज सालाना बढ़ोतरी है. कर्ज बढ़ने की वजह ये है कि ज्यादातर विकसित और विकासशील देश खूब उधार ले रहे हैं.

वीडियो: अमेरिका 300 अरब डॉलर की रिफाइनरी खोलने वाली है, रिलायंस का नाम लेकर ट्रंप क्या बोले?

Advertisement