The Lallantop

सेहत के लिए अच्छी सब्ज़ियों में मिला सीसा, ये शरीर में गया तो क्या होगा?

बेंगलुरु और उसके आसपास के बाज़ारों में एक इनवेस्टिगेशन हुई. इसके तहत, यहां बिकने वाली सब्ज़ियों के 72 सैंपल्स लिए गए. पता चला कि 19 सैंपल्स में लेड यानी सीसा है. ये एक हेवी मेटल है. इसकी थोड़ी मात्रा भी शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है.

Advertisement
post-main-image
सब्ज़ियों को अच्छे से धोकर ही पकाएं

आप हरी सब्ज़ियां खरीदते हैं. ये सोचकर कि वो हेल्दी हैं. उनसे पोषण मिलेगा. लेकिन यही सब्ज़ियां आपके शरीर में ऐसा हेवी मेटल जमा कर रही हैं जो सेहत के लिए बहुत नुकसानदेह है. दरअसल, बेंगलुरु और उसके आसपास के बाज़ारों में एक इनवेस्टिगेशन हुई. इसके तहत, यहां बिकने वाली सब्ज़ियों के 72 सैंपल्स लिए गए. फिर इनमें 11 हेवी मेटल्स, 3 मिनरल्स और करीब 230 तरह के पेस्टिसाइड्स यानी कीटनाशकों की जांच की गई.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

पता चला कि 72 में से 19 सैंपल ऐसे हैं. जिनमें लेड है. लेड यानी सीसा. ये एक हेवी मेटल है. इसकी थोड़ी मात्रा भी शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है. सबसे ज़्यादा लेड बैंगन में मिला. जितनी सेफ़ लिमिट है. उससे करीब 20 गुना ज़्यादा. इसके अलावा लौकी, बीन्स, चुकंदर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, मिर्च, खीरा, जूट के पत्ते, गांठ गोभी और कद्दू में भी लेड पाया गया.

इंडिया टुडे के मुताबिक, सभी सैंपल्स की जांच फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI द्वारा मान्यता प्राप्त लैब में की गई थी. ये जांच रिपोर्ट 12 फरवरी 2026 को सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की एक कमेटी ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंपी थी.

Advertisement

पर सब्ज़ियों में लेड पहुंचा कैसे? लेड शरीर को कितना नुकसान पहुंचाता है? और इससे बचने का तरीका क्या है? ये हमने पूछा शारदाकेयर हेल्थसिटी में गैस्ट्रोएंटरोलॉजी डिपार्टमेंट के सीनियर डायरेक्टर और यूनिट हेड, डॉक्टर विनीत कुमार गुप्ता से.

dr vinit kumar gupta
डॉ. विनीत कुमार गुप्ता, सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, शारदाकेयर हेल्थसिटी

डॉक्टर विनीत बताते हैं कि सब्ज़ियों में लेड पहुंचना पर्यावरण प्रदूषण से जुड़ा हो सकता है. जब ऐसे इलाकों में खेती की जाती है. जहां की मिट्टी, पानी और हवा में हेवी मेटल्स मौजूद हों. तब पौधे अपनी जड़ों के ज़रिए इन्हें सोख लेते हैं.

अगर खेती इंडस्ट्रियल एरिया के आसपास की जा रही है. तब ख़तरा और बढ़ जाता है. क्योंकि इंडस्ट्रीज़ से निकलने वाला धुआं और कचरा, मिट्टी व पानी को प्रदूषित कर सकते हैं.

Advertisement

कई बार पुराने कीटनाशक छिड़कने, गंदे पानी से सिंचाई करने और सड़क किनारे उगाई गई सब्ज़ियों में लेड की मात्रा ज़्यादा हो सकती है.

लेड एक हेवी मेटल है. शरीर को इसकी बिल्कुल ज़रूरत नहीं होती. पर खाने-पानी के ज़रिए ये शरीर में पहुंच सकता है. इसकी थोड़ी मात्रा भी शरीर को बहुत नुकसान पहुंचाती है. जब लेड शरीर में पहुंचता है. तो ये धीरे-धीरे खून, हड्डियों और अंगों में जमा हो सकता है. प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों पर ये ज़्यादा गंभीर असर कर सकता है. क्योंकि ये दिमाग और नर्वस सिस्टम पर असर डालता है.

led
लेड शरीर में जमा होता रहे, तो लिवर और किडनी से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं 

लंबे समय तक लेड के संपर्क में रहने पर किडनी और लिवर से जुड़ी दिक्कतें हो सकती हैं. एनीमिया हो सकता है. बच्चों के दिमागी विकास, याद्दाश्त और सीखने की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ता है.

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसी सब्ज़ियां खाता है. जिनमें लेड की मात्रा बहुत ज़्यादा है. तब व्यक्ति को धीरे-धीरे कुछ लक्षण दिखाई देते हैं. जैसे थकान, सिरदर्द, पेटदर्द और भूख कम लगना. इसलिए आपके खाने में हेवी मेटल्स बिल्कुल भी नहीं होने चाहिए.

अगर आप सब्ज़ियों को ठीक से धोकर पकाएं. तो हेवी मेटल्स के एक्सपोज़र से बचा जा सकता है. सब्ज़ियों को बहते पानी में अच्छी तरह धोएं. कोशिश करें कि उन्हें 10-15 मिनट तक नमक या सिरके वाले पानी में भिगोएं. साथ ही, सब्ज़ियों को ठीक से पकाएं. इससे उनपर मौजूद पेस्टिसाइड्स और धूल को साफ किया जा सकता है.

वीडियो: सेहत: रात में पैरों में ऐंठन हो, तो ऐसे दूर करें

Advertisement