The Lallantop

भाजपा प्रवक्ता ने केजरीवाल को गाली दी, केजरीवाल भी उनसे कम नहीं निकले

भाजपा प्रवक्ता को अंदाजा भी नहीं है कि केजरीवाल को गाली देने के चक्कर में वो क्या कर बैठे...

Advertisement
post-main-image
अवधूत वाघ महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्ता हैं. इन्होंने अरविंद केजरीवाल को टैग करके एक ट्वीट किया. विरोधी को टारगेट करने के चक्कर में न केवल वो कम्युनल हो गए, बल्कि उन्होंने दलितों की एक जाति 'कंजर' को भी गाली की तरह इस्तेमाल किया.
अवधूत वाघ महाराष्ट्र बीजेपी के प्रवक्ता हैं. इन जनाब ने 7 मार्च को एक ट्वीट किया. ट्वीट में बिना केजरीवाल का नाम लिए लिखा. लेकिन बाद में हैशटैग के साथ अरविंद केजरीवाल लिख दिया. उनका ट्वीट था -
पाकिस्तानी सेना का एक सीक्रेट कर्नल भारत में छिपकर पाकिस्तान के लिए काम कर रहा है. नाम है- अल #^#$ बिन #$&* मौहम्मद कंजरवाल खान. #ArvindKejriwal
गाली जो दी, वो दी, उसके अलावा अवधूत ने एक पूरी जाति का अपमान किया है कितनी घटिया भाषा है नेता जी की. राजनैतिक विरोध के नाम पर भाषा रसातल में धंस गई है. अवधूत को किसी ने बताया कि नहीं, पता नहीं. कंजर दलित वर्ग की एक जाति है. इनको कंजर और कंजड़, दोनों कहते हैं. ये अनुसूचित जाति (SC) कैटगरी में आते हैं. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और दिल्ली, कई राज्यों में इनकी आबादी है. नीचे राजस्थान सरकार की SC जातियों की लिस्ट है. 2018 की इस लिस्ट में 33वें नंबर पर हैं कंजर. ये बहुत गरीब वर्ग में आते हैं. केजरीवाल को गाली देने के चक्कर में 'कंजरवाल' लिखकर अवधूत ने पूरी कंजर जाति की बेइज्जती की है. दलितों का अपमान किया है. ये वही करप्ट सोच है, जो दलितों की कई जातियों को गाली की तरह इस्तेमाल करती है.
ये राजस्थान सरकार के सोशल जस्टिस ऐंड एम्पावरमेंट डिपार्टमेंट की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है. इसमें उन 59 जातियों की लिस्ट है, जिनकी यहां शिड्यूल्ड कास्ट में गिनती होती है. 33वें नंबर है कंजर जाति.
ये राजस्थान सरकार के सोशल जस्टिस ऐंड एम्पावरमेंट डिपार्टमेंट की वेबसाइट का स्क्रीनशॉट है. इसमें उन 59 जातियों की लिस्ट है, जिनकी यहां शिड्यूल्ड कास्ट में गिनती होती है. 33वें नंबर है कंजर जाति.

 
कंजर काफी गरीब जाति है. राजस्थान के अलावा और भी कई इलाकों में इनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है.
कंजर काफी गरीब जाति है. राजस्थान के अलावा और भी कई इलाकों में इनकी अच्छी-खासी मौजूदगी है. काफी गरीब वर्ग में गिनती होती है इनकी.

गालियां देने में भी कम्युनल! बीजेपी सोचे कि उसने किस तरह के इंसान को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी है. जो अपने विरोधी को टारगेट करने के लिए सांप्रदायिक और जातिगत टिप्पणियां करता है. ये महाशय प्रवक्ता होकर ट्विटर पर खुल्लम-खुल्ला गालियां लिख रहे हैं. गालियां भी इस स्टाइल में दी हैं कि सामने वाले को 'मुसलमान' करेक्टर दे दिया. पाकिस्तान के साथ राइमिंग जो करनी थी. ये इंसान गाली देने में भी सांप्रदायिक है, हद है. इन्हीं अवधूत ने अपने ट्विटर हैंडल पर बड़े गर्व से लिखा हुआ है-
ट्विटर पर मेरे जीवित भगवान नरेंद्र मोदी मुझे फॉलो करते हैं. 
अवधूत जी, अपनी डिग्रियां जला दीजिए अवधूत ने ट्विटर हैंडल पर अपने इंट्रोडक्शन में लिखा है. कि वो पेशे से इंजिनियर हैं. मुझे लगता है कि अवधूत को अपनी डिग्री जला देनी चाहिए. पढ़-लिखकर भी अगर आपको बात करने का शऊर नहीं, अगर आपकी किताबें आपको बात करने का सलीका नहीं सिखातीं, ये बुद्धि नहीं देतीं कि बिना गाली-गलौच के भी विरोध किया जा सकता है, तो लानत है ऐसी शिक्षा पर.

ये अवधूत का ट्वीट है. कितना अजीब संयोग है कि ठीक नीचे वाले ट्वीट में कल्चर और मुसलमान, दोनों का ज़िक्र है.

केजरीवाल भी कहां पीछे रहने वाले थे? थोड़े से शब्द अरविंद केजरीवाल तक भी पहुंचाने हैं. अवधूत के ट्वीट पर उन्हें गुस्सा आए, स्वाभाविक है. वो अवधूत की आलोचना करें, वो भी वाज़िब है. लेकिन केजरीवाल ने आलोचना के लिए जो ट्वीट किया, उसमें कबाड़ कर दिया. लिखा-
प्रधानमंत्री जी. आप इसको ट्विटर पर फॉलो करते हो. आपका चेला है. भाजपा का पदाधिकारी है. गाली हमारे वाले भी दे सकते हैं. पर हम हिंदू हैं. हमारी हिंदू सभ्यता हमें गाली देना नहीं सिखाती.

अगर अरविंद केजरीवाल तक मेरी लिखी ये खबर पहुंचे, तो मेरा आग्रह है कि वो थोड़ा सोचें. अवधूत की आलोचना के सौ सही तरीके हो सकते थे. ये 'हम हिंदू हैं' कहीं से भी उन वाज़िब तरीकों में नहीं गिना जा सकता.

हिंदू नहीं होते तो खूब गालियां देते क्या? ये अव्वल दर्ज़े की मूर्खता है. इस ट्वीट को पढ़ने से पहले मुझे बस अवधूत पर गुस्सा आ रहा था. इसको पढ़ने के बाद मुझे केजरीवाल पर भी जमकर गुस्सा आ रहा है. लिखा ऐसे है कि मानो हिंदू नहीं होते, तो खूब गालियां देते. बस हिंदू पहचान ने ही जीभ को रोक रखा है! मतलब हिंदुओं के अलावा बाकी सारे धर्म, सारी संस्कृतियां गालीबाज होती हैं क्या? और कितना गर्व है इस लाइन में कि गाली हमारे वाले भी दे सकते हैं. कोई कॉम्पिटिशन है क्या कि अपनी काबिलियत का इज़हार जरूरी है.
केजरीवाल ऐसे तमाम मौकों पर मात खा जाते हैं. अवधूत के किए पर बिफरने के लिए हिंदू कार्ड खेलने की ज़रूरत नहीं थी. इस तरह की आइडेंटिटी से खुद को जोड़े बिना भी अपनी बात कही जा सकती थी. बीजेपी को टारगेट करने के लिए खुद को ज्यादा हिंदू दिखाने की भी ज़रूरत नहीं. इस तरह के ड्रामे, इस तरह की गर्त में गिरे बिना भी अपनी बात कही जा सकती है.


भारत में मॉब वायलेंस के इतने वीडियो क्यों सामने आ रहे हैं?

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement