टिम पेन ने ये तो कह दिया कि इंडिया को पिचों से मदद मिली. मगर ये नहीं कहा कि इंडिया ने अब ऑस्ट्रेलिया में अभी तक अपनी कमजोर रही पेस बॉलिंग को अपनी मजबूती बना लिया है. जसप्रीत बुमराह, इशांत शर्मा और मोहम्मद शमी की तिकड़ ने इस पूरी सीरीज में जबरदस्त गेंदबाजी की है. जो काम ऑस्ट्रेलिया के मिशेल स्टार्क से करने की उम्मीद थी, वो जसप्रीत बुमराह ने कर दिया. तो यहां टिम पेन को ये समझने की जरूरत है कि टीम इंडिया ने पिचों की बदौलत मैच नहीं जीते हैं, ये मुश्किल मौकों पर टिके रहने और पेशंस की जीत है. अब मुकाबला 3 जनवरी से सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर है और ये सीरीज का निर्णायक मैच है. जब से टिम पेन को ये खबर लगी है कि सिडनी की पिच भी ड्राई और लो होगी, कप्तान के होश उड़ गए हैं. इस सीजन में सिडनी के मैदान पर खूब रन बने हैं. हाल ही में यहां तीन जेएलटी शैफील्ड शील्ड मैच हुए जहां 8 शतक, एक 99 रनों की पारी और 13 हाफ सेंचुरी बनीं. इसके अलावा पिछले महीने जब इंडिया ने यहां एक वॉर्म अप मैच खेला था तब भी रनों की खूब बरसात हुई थी. इंडिया के छह बल्लेबाजों ने यहां हाफ सेंचुरी बनाईं थी. ऐसे में टिम पेन ये सोच सोच कर परेशान हैं कि आखिरी मैच में इंडिया रनों का पहाड़ खड़ा कर ऑस्ट्रेलिया को पटक देगी और ये सीरीज 3-1 से जीत जाएगी.























