नोटबंदी के बाद चिल्लर का बड़ा रोना है. 5 और 10 के सिक्के भी लोग बटोर के रखने लगे हैं. ज्यादा परेशानी होती है सब्जी वगैरह खरीदने में. लेकिन इसके लिए तेलंगाना के एक बाजार में 'लल्लनटाप' तरीका निकाला गया है. तेलंगाना सरकार प्रदेश में कई जगहों पर 'रायथू बाजार' चलाती है, जहां सीधे किसान अपना सामान बेचते हैं. अगर आपका बैंक अकाउंट आधार नंबर से जुड़ा है तो आप यहां बिना कैश के खरीदारी कर सकते हैं. तेलंगाना के स्टेट मार्केटिंग डिपार्टमेंट ने एक नया प्रयोग किया है. सब्जी बाजारों में कैश को टोकन से बदलने का. ये टोकन 5, 10 और 20 रुपयों की कीमत में अवेलेबल हैं. 'द इंडियन एक्सप्रेस' की खबर के मुताबिक, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट फाइनेंशियल कॉरपोरेशन (IDFC) ने कई बाजारों में मोबाइल काउंटर बनाए हैं, जहां से ये टोकन लिए जा सकते हैं. इन काउंटर्स पर एक छोटी सी हाथ में पकड़ी जा सकने वाली मशीन है जो सारे बैंक के सर्वर से जुड़ी रहती है. इसी काउंटर पर एक छोटी मोबाइल ATM मशीन भी रखी रहती है, जिसमें 25 हजार रुपये तक का कैश पड़ा रहता है. आपको टोकन चाहिए तो वहां अपना आधार नंबर दीजिए. ये नंबर उस छोटी मशीन में फीड किया जाएगा. वहां से आपके बैंक अकाउंट से लेकर फिंगर प्रिंट तक सारी जानकारी वेरिफाई हो जाएगी. इस वेरिफिकेशन के बाद आप वहां से 500 रुपये तक की कीमत के टोकन ले सकते हैं. ये रकम आपके बैंक अकाउंट से कट जाएगी. आपके मोबाइल पर पैसा कटने का SMS भी आ जाएगा. ये टोकन 5, 10 और 20 रुपये की कीमत में होंगे, इसिलए आपको छोटी खरीदारी में दिक्कत नहीं होगी. अच्छा अब ये सवाल कि किसान और सब्जी बेचने वाले जो ये टोकन आपसे लेंगे, उन्हें इसके बदले पैसा कहां से मिलेगा? तो व्यवस्था ये है कि दिन के आखिर में सारे किसानों और दुकानदारों को IDFC काउंटर पर सारे टोकन जमा करने होंगे. जिसके पास जितने टोकन होंगे, उसी हिसाब से रकम उनके अकाउंट में ट्रांसफर कर दी जाएगी. तेलंगाना के मार्केटिंग और सिंचाई मंत्री टी हरीश राव ने बताया, 'IDFC काउंटर पर मोबाइल ATM का भी इंतजाम है. किसी किसान को अगर थोड़ी रकम कैश में चाहिए, तो टोकन के बदले वो वहां से कैश भी ले सकता है और बची हुई रकम अपने अकाउंट में ट्रांसफर करवा सकता है.' साथ ही, IDFC एजेंट्स को बैंकों से कमिशन मिलेगा. शुक्रवार को कुकटपल्ली के रायथू बाजार से ये प्रयोग शुरू हुआ. शुरू में दिक्कत हुई क्योंकि बहुत सारे खरीदार और बेचने वालों को अपने आधार नंबर याद नहीं थे. लेकिन बाद में प्रयोग अच्छा रहा. इस प्रयोग से किसान, जिनकी सब्जियां और फल बिना खरीदार के बासी हो रही थीं, उन्हें राहत मिली है. सांगारेड्डी के एक किसान नल्ला श्रीरामुलु ने बताया, 'पिछले हफ्ते मेरी कोई बिक्री नहीं हुई. हमें काफी टमाटर और बंद गोभी फेंकनी पड़ी. लेकिन सुबह से मैं टोकन ले रहा हूं. मेरा बेटा आधार नंबर ले आया और काउंटर पर दे दिया. अभी तक हमारे पास करीब 40 टोकन हैं. शाम को मैं इनके बदले पैसे ले लूंगा.'
ये भी पढ़ें मोदी का मंसूबा टूट रहा है, बैंक खुद ब्लैक मनी को वाइट कर रहे हैं ये कैसी तैयारी, नए नोट आधे छपे हुए निकल रहे हैं एटीएम से!
छुट्टे नहीं मिल रहे? तेलंगाना वालों से सीखो, ये जुगाड़ अपनाओ
यहां अब 5 और 10 के सिक्के नहीं, टोकन चलते हैं.
Advertisement

Symbolic Image
Add Lallantop as a Trusted Source

Advertisement
Advertisement
Advertisement





















