हिंदुस्तान टाइम्स के प्रवीण कुमार की खींची ये तस्वीर बहुत वायरल हुई. नोटबंदी के वक्त उन्होंने गुड़गांव में SBI, न्यू कॉलोनी ब्रांच के सामने लगी लाइन में ये फोटो क्लिक की थी.
नोटबंदी के बाद लाइन में लगकर एक आदमी की मौत हुई थी. ये बात केंद्र सरकार ने मानी है. वित्तमंत्री अरुण जेटली ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए ये बात कही. ये सवाल पूछा था CPM के सांसद ई करीम ने. करीम ने पूछा था कि नोटबंदी के बाद के दिनों में पैसे बदलवाने के लिए लगी कतारों में कितने लोगों की मौत हुई. ये पहली बार है जब सरकार ने ऐसी किसी मौत पर मुहर लगाई है.
पढ़ें: नोटबंदी के फैसले की धज्जियां उड़ा दीं उस वक्त के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने

कतार में खड़े कुछ लोगों की मौत की खबरों को बीजेपी ने लगातार ख़ारिज़ किया था. ये बीजेपी IT सेल के प्रमुख अमित मालवीय का ट्वीट है.
तीन बैंक कर्मचारियों की भी मौत हुई
नोटबंदी के बाद के दिनों में नोट बदलवाने और पैसे निकालने के लिए लंबी-लंबी लाइनें लगीं. इस दौरान कई खबरें आईं कि फलां जगह लाइन में खड़े-खड़े आदमी मर गया. बीमार हो गया. बेहोश हो गया. मगर इनपर आधिकारिक ठप्पा नहीं लगा कभी. ये पहली बार है, जब सरकार ने एक मौत की बात कबूली है. जेटली के मुताबिक, सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने जानकारी दी है कि नोट बदलने के लिए लाइन में लगे आदमी की मौत हुई. SBI के अलावा किसी और सरकारी बैंक ने ये सूचना नहीं दी है सरकार को. न केवल SBI ने अपने यहां पैसे बदलवाने के लिए लाइन में खड़े एक आदमी के मरने की बात कही. बल्कि ये भी बताया कि इस दौरान बैंक के तीन कर्मचारियों की भी मौत हुई थी. नोटबंदी के बाद के दिनों में बैंक के लोगों को बहुत लंबी-लंबी शिफ्ट करनी पड़ी थीं. उनके ऊपर काम का बहुत ज़्यादा प्रेशर था. बैंक कर्मचारियों की मौत क्यों हुई, क्या इसकी वजह काम का लोड था, ये साफ़ नहीं हो पाया है.
पढ़ें: नोटबंदी पर सरकार के 5 दावे और उनकी हकीकत
बैंक ने कितना मुआवजा दिया?
वित्तमंत्री ने राज्यसभा को बताया. कि लाइन में जिस शख्स की मौत हुई, उसके परिवार को तीन लाख रुपये का मुआवजा दिया गया. जो तीन बैंक कर्मचारी गुज़र गए, उनके परिवार को 44.06 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया.
ई करीम ने अपने सवाल में ये भी पूछा कि 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट वापस लेने, उन्हें नष्ट करने और नए नोट जारी करने में रिजर्व बैंक का कितना रुपया ख़र्च हुआ. इसके जवाब में जेटली ने बताया कि नोटबंदी से पहले साल 2015-16 में इन नोटों की छपाई पर करीब 34.21 अरब रुपये ख़र्च हुए थे. 2016-17 में 79.65 अरब रुपये और 2017-18 में 49.42 अरब रुपये का ख़र्चा आया.
'कुछ चुनावी वादे चुनाव जीतने के लिए होते हैं, जरूरी नहीं कि पूरे हों'
सरकार वापस सुप्रीम कोर्ट क्यों गई कि ये टाइपिंग की गलती है इसे सुधार लीजिए?