अंजलि और इब्राहिम आखिरकार एक हो गए. 20 नवंबर के दिन अंजलि ने सखी सेंटर छोड़ दिया और इब्राहिम के साथ चली गई. कड़ी सुरक्षा के बीच दोनों का मिलन हुआ. लेकिन फिर भी अंजलि को लगता है कि अभी भी उसे खतरा है. उसने अपने परिवार से अपील की है कि उसे और उसकी शादी को स्वीकार कर लिया जाए.
शादी के डेढ़ साल बाद साथ रहेंगे अंजलि और इब्राहिम, पहले परिवार फिर पुलिस ने लगाया था अड़ंगा
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी अंजलि को नहीं छोड़ा गया.


वैसे तो अंजलि को 18 नवंबर के दिन ही इब्राहिम के पास चले जाना था. लेकिन वो जा नहीं सकी. क्योंकि प्रशासन ने उसे सखी सेंटर छोड़ने की अनुमति नहीं दी. वो भी तब जब हाईकोर्ट ने आदेश दे दिया था कि लड़की अपनी मर्जी और खुशी से जहां रहना चाहे रह सकती है. प्रशासन का कहना था कि उन्हें हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली थी. इसके अलावा हाईकोर्ट के आदेश में कही गई एक बात को भी प्रशासन ने तर्क के तौर पर पेश किया.
15 नवंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा था कि लड़की को छोड़ने से 24 घंटे पहले उसके पिता अशोक कुमार जैन और पति इब्राहिम को सूचित करना होगा. इब्राहिम को तो जानकारी दे दी गई थी, लेकिन अशोक कुमार से बात नहीं हो सकी थी. पुलिस का कहना था कि अशोक का फोन स्विच ऑफ आ रहा था और वो घर पर भी नहीं मिले, जिसके बाद अंजलि भूख हड़ताल पर बैठ गई थी. खैर, अब अपडेट ये है कि वो इब्राहिम के पास पहुंच गई है.
क्या है पूरा मामला?
ये मामला है छत्तीसगढ़ का. रायपुर का मामला. अंजलि जैन और इब्राहिम सिद्दीकी. दोनों प्यार करते हैं. फरवरी, 2018 में दोनों ने आर्य समाज विधि से शादी कर ली. घरवालों से छिपकर. इब्राहिम ने दावा किया कि शादी के पहले उसने हिन्दू धर्म अपना लिया था. नाम आर्यन आर्य. कुछ दिन बाद मामला खुल गया. लड़की के घर वालों ने आपत्ति तो दर्ज की ही, साथ में जैन और हिन्दू समुदाय के लोगों ने भी आपत्ति दर्ज की.
मामला बढ़ा. कोर्ट-कचहरी तक फैल गया. लड़की चली गयी सखी वन स्टॉप सेंटर. और कई महीनों तक वहीं रही. लड़की अपने मम्मी-पापा के साथ नहीं रहना चाहती थी. और आशंका थी कि पति के पास जायेगी तो माहौल बिगड़ेगा. इसलिए प्रशासनिक कस्टडी भी साथ में. बीते हफ्ते का शुक्रवार. यानी 15 नवंबर. छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस पीआर रामचंद्र मेनन और जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू ने कहा कि लड़की को आज़ाद कर देना चाहिए. उसके बाद 18 नवंबर को उसे सखी सेंटर से छोड़ा जाना था. नहीं छोड़ा गया. 20 नवंबर के दिन वो आज़ाद हुई. मामले को और डिटेल में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.
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