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बंदूकधारी ने मस्जिद में की गोलीबारी, इमाम और तीन साल के बच्चे समेत 6 लोगों की मौत

हमला Afghanistan के हेरात प्रांत में हुआ. जब लोग मस्जिद में नमाज़ पढ़ रहे थे, उसी वक़्त एक बंदूकधारी ने वहां हमला कर दिया.

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हमले में 6 लोगों की मौत हो गई. (प्रतीकात्मक तस्वीर - आजतक)

पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान (Afghanistan) में एक बंदूकधारी मस्जिद (Gunman Stormed A Mosque) में घुस गया और फ़ायरिंग शुरू कर दी. इस फ़ायरिंग (Firing) में नमाज़ अदा कर रहे 6 लोगों की मौत हो गई. लोकल मीडिया रिपोर्ट्स और अफ़ग़ानिस्तान के एक पूर्व राष्ट्रपति का कहना है कि ये हमला इसीलिए हुआ, क्योंकि वहां शिया अल्पसंख्यक (Shia Community) नमाज़ पढ़ते हैं. तालिबान (Taliban) के आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता अब्दुल मतीन कानी ने बताया कि ये हमला हेरात प्रांत के गुज़रा ज़िले में हुआ.

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ये घटना 29 अप्रैल की रात हुई. अब्दुल मतीन ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर इसकी जानकारी दी. लिखा,

"दुर्भाग्य से 29 अप्रैल की रात 9:00 बजे हेरात प्रांत के गुज़रा ज़िले के शाहरक इलाक़े में एक अज्ञात हथियारबंद व्यक्ति ने एक मस्जिद में हमला कर दिया और आम नमाज़ियों पर गोली चला दी. इसमें 6 नागरिक शहीद हो गए और एक नागरिक घायल हो गया. मामले की ज़्यादा जानकारी बाद में दी जाएगी."

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बताया गया कि फ़ायरिंग के बाद हमलावर वहां से भाग गया. मारे गए लोगों में मस्जिद के इमाम और एक तीन साल का बच्चा भी शामिल हैं. अभी तक किसी ने हमले की ज़िम्मेदारी नहीं ली है. मामले पर अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई ने X पर लिखा,

"मैं हेरात प्रांत के गुज़रा ज़िले में इमाम ज़मान मस्जिद पर हमले की कड़ी निंदा करता हूं, जिसकी वजह से हमारे कई प्रिय हमवतन शहीद और घायल हो गए. मैं इस आतंकवादी कृत्य को सभी धार्मिक और मानवीय मानकों के ख़िलाफ़ मानता हूं. मेरी इस दुखद घटना के पीड़ितों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना है."

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IS का ख़तरा

डॉन की एक ख़बर के मुताबिक़, आधिकारिक बयानों से इतर स्थानीय लोगों ने दूसरी बात कही. स्थानीय लोगों का कहना है कि तीन बंदूकधारियों की एक टीम ने हमला किया. मारे गए इमाम के भाई इब्राहिम अख़लाक़ी ने बताया कि उन तीनों में से एक बाहर था, जबकि दो लोग मस्जिद के अंदर चले गए. फिर नमाज़ पढ़ रहे लोगों को गोली मार दी. हालांकि अभी तक किसी भी समूह ने हमले का दावा नहीं किया है. लेकिन इस्लामिक स्टेट (IS) समूह का अफ़ग़ानिस्तान में क्षेत्रीय सहयोगी तालिबान का एक प्रमुख प्रतिद्वंदी है. वो अक्सर देश भर में स्कूलों, अस्पतालों, मस्जिदों और शिया क्षेत्रों को निशाना बनाता है.

अगस्त 2021 में सत्ता में लौटने के बाद तालिबान सरकार ने धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की रक्षा का वादा किया था. लेकिन कई संगठनों का मानना है कि उन्होंने इस वादे को पूरा करने का काम बहुत कम ही किया है. तालिबान के सत्ता संभालने के बाद IS से जुड़ा सबसे कुख्यात हमला 2022 में हुआ था. तब एक शिक्षा केंद्र पर आत्मघाती बम विस्फोट में 46 लड़कियों और युवतियों सहित कम से कम 53 लोग मारे गए थे. तालिबान के अफसरों ने राजधानी काबुल के शिया इलाक़े में हुए इस हमले के लिए IS को ज़िम्मेदार ठहराया था.

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