गौतम अडानी ग्रुप (Gautam Adani Group) भारत में हाइड्रोजन से चलने वाला ट्रक ला रहा है. ग्रुप ने 17 जनवरी को इस बात की घोषणा की. अडानी ग्रुप ने अशोक लेलैंड (Ashok Leyland) और कनाडा की कंपनी बलार्ड पॉवर (Ballard Power) के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया है. इस एग्रीमेंट के तहत हाइड्रोजन फ्यूल (Hydrogen Fuel) से चलने वाले ट्रक बनाए जाएंगे. बताया जा रहा है कि एशिया में ऐसा पहली बार होगा.
अडानी ग्रुप का नया ट्रक, जो थोड़े से ईंधन में लंबा चलेगा और प्रदूषण होगा मात्र जीरो
अडानी ग्रुप ने कनाडा की कंपनी से एग्रीमेंट किया है.


अडानी ग्रुप जिस ट्रक को लाने की सोच रहा है, उसकी क्षमता 55 टन की होगी. ट्रक में तीन हाइड्रोजन टैंक होंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये ट्रक 200 किलोमीटर की वर्किंग रेंज देंगे. इन टैंकों को बनाएगी बलार्ड पॉवर. इसके लिए बलार्ड अपनी 120 किलोवॉट वाली PEM फ्यूल सेल टेक्नॉलजी यूज करने वाली है. अडानी ग्रुप ने बताया कि वो फ्यूल सेल इलेक्ट्रिक ट्रक को साल 2023 में लांच करेगा. इन ट्रकों का इस्तेमाल माइनिंग और ट्रांसपोर्टेशन के कामों में होगा.
ये प्रोजेक्ट अडानी इंटरप्राइज द्वारा लीड किया जाएगा. साथ ही बलार्ड पॉवर हाइड्रोजन ट्रकों के लिए अपना FCmoveTM फ्यूल सेल इंजन सप्लाई करेगी. बता दें कि बलार्ड पॉवर PEM फ्यूल इंजन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. वहीं अशोक लेलैंड बस बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. अशोक लेलैंड की तरफ से इस प्रोजेक्ट को टेक्निकल सपोर्ट मुहैया कराई जाएगी. कंपनी व्हिकल सपोर्ट भी देगी. आपको बता दें कि व्हिकल सपोर्ट वो होता है, जिसके आधार पर कोई भी गाड़ी बनाई जाती है. आसान भाषा में कहें तो ये गाड़ी की नींव होती है. व्हिकल सपोर्ट बनने के बाद ही गाड़ी में बाकी की चीजें जोड़ी जाती हैं.
इधर बलार्ड पॉवर के CEO रैंडी मै का कहते हैं,
'पिछले साल अडानी ग्रुप के साथ समझौते पर साइन करने के बाद हम अपनी पार्टनशिप को आगे ले जाने के लिए काफी ज्यादा उत्साहित हैं. हमारी टेक्नॉलजी की मदद से इनके हैवी ड्यूटी माईनिंग ट्रकों को काफी ज्यादा ताकत मिलेगी और हमारे जीरो एमिशन इंजन की मदद से अच्छा माइलेज भी मिलेगा. इसकी मदद से रैपिड रिफ्यूलिंग होगी और साथ ही ज्यादा वजन उठाने की क्षमता बढ़ेगी.'
वहीं अडानी ग्रुप घोषणा कर चुका है कि आने वाले 10 सालों में वो ग्रीन हाइड्रोजन और इससे जुड़ी चीजों पर 50 बिलियन डॉलर खर्च करेगा. यानी 4 लाख करोड़ से ज्यादा रुपए. हर साल करीब 30 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की योजना है.

















