कर्नाटक में कांग्रेस के एक विधायक हैं, बी नारायण राव. ये माननीय बीदर जिले के बसवकल्याण विधानसभा क्षेत्र से जीते हैं. 18 मार्च को एक चुनावी सभा कर रहे थे. चुनावी मौसम है. सभाओं में टीका-टिप्पणी होती रहती है. सो विधायक नारायण राव प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा पर जुबानी तीर छोड़ रहे थे. लेकिन बोलते-बोलते स्तरहीन बातें बोलने लगे. पीएम मोदी पर अशोभनीय टिप्पणी कर गए. कहा कि
जो लोग नामर्द हैं वे शादी कर सकते हैं, लेकिन बच्चे नहीं कर सकते. पीएम मोदी शादी कर सकते हैं, लेकिन बच्चे नहीं हो सकते.

चुनावी सभा के दौरान विधायक नारायण राव.
ये पहली बार नहीं है जब पीएम की शादी से जुड़ी बात पर विपक्षी नेताओं की ज़ुबान फिसली हो.
डॉ. महेश शर्मा. केंद्र में मंत्री हैं. संस्कृति मंत्रालय. माने, इनके कंधों पर संस्कृति को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी है. भारत की संस्कृति, परंपरा को संजोने की जिम्मेदारी है. लेकिन बोलते वक्त उनको ना लिहाज़ रहा, ना लिहाफ. उत्तर प्रदेश के सिकंदराबाद में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे. बोलते-बोलते कांग्रेस सचिव प्रियंका गांधी पर अभद्र टिप्पणी कर गए. पहले तो राहुल का मज़ाक उड़ाने की कोशिश की और फिर प्रियंका के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया. इस पूरी बदतमीजी में ममता बनर्जी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री कुमारास्वामी पर भी बोल दिया.# दोनों ही कम नहीं हैं -
महेश शर्मा ने कहा-
अगर ममता बनर्जी यहां आ करके कत्थक करे और कर्नाटक के सीएम गीत गाए तो कौन सुन रहा है? पप्पू कहता है मैं प्रधानमंत्री बनूंगा. मायावती, अखिलेश, पप्पू और अब तो पप्पू की पप्पी भी आ गई है. प्रियंका. क्या वो पहले देश की बेटी नहीं थी क्या? क्या वो कांग्रेस की बेटी नहीं थी क्या? इस सोनिया परिवार की बेटी नहीं थी क्या...अब नहीं है क्या.. आगे नहीं रहेगी क्या.. क्या नया लेकर आई हो?Union Min Mahesh Sharma in Sikandrabad- "Agar Mamata Banerjee yahan aa karke Kathak kare aur K'taka CM geet gaye toh kaun sun raha hai? Pappu kehta hai ki PM banunga,ab toh Pappu ki Pappi (Priyanka Gandhi)bhi aa gayi.Inse upar uth kar dekhna hai toh aaj humara sher Modi hai(16/3) pic.twitter.com/AQW6tCtRzZ

संस्कृति मंत्रालय के एक कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ डॉ. महेश शर्मा
खैर महेश शर्मा हों या फिर बी नारायण राव, पक्ष हो या विपक्ष, चुनाव जीतने की होड़ में सब जायज-नाजायज दाव लगाने को आतुर हैं. मानो, रेस लगी हो कि कौन कितना नीचे गिरता है. असल मुद्दे छूट रहे हैं. जिन पर चुनाव लड़ा जाना चाहिए. नुकसान जनता का है. खैर, आप भी पैनी निगाह रखिए, हम भी रखेंगे. क्योंकि, लोकतंत्र में जनता को चूना लगाने की इजाज़त किसी को नहीं है.
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