नवाब की दो बेटियां थीं, लेकिन वो बड़ी बेटी रिज़वाना के ज़्यादा करीब था. चार साल की वो बच्ची पिछले कुछ समय से अपनी दादी के घर पर थी. नवाब ने जिस दिन उसकी हत्या की, उसी दिन सुबह जाकर उसे वो वहां से लाया था. इसके बाद उसे ढेर सारी मिठाइयां वगैरह दीं. घुमाया-फिराया. ठीक उसी तरह जैसे बकरे की कुर्बानी देने से पहले उसे खिलाया-पिलाया जाता है. फिर घर जाकर सब सो गए.
आधी रात को नवाब उठा. बेटी को अपने साथ बरामदे में ले गया और अपनी गोद में बिठा लिया. कलमा पढ़ा और बच्ची का गला रेत दिया. नवाब का मानना था कि अपनी सबसे प्यारी चीज़ कुर्बान करने से अल्लाह उसपर मेहरबान हो जाएगा. उसने पकड़े जाने के बाद कहा
नमाज़ी हूं, वो जान से ज्यादा प्यारी थी. कत्ल के बाद उसे दफनाना चाहता था, लेकिन नाकाम रहा.कैसे सामने आया मामला?
ये मामला सामने तब आया जब रिज़वाना की कुछ देर तक कोई खोज-खबर नहीं मिली. नवाब की पत्नी शबाना अपनी बच्ची को ढूंढने लगीं. इसी दौरान उनकी नज़र खून में सनी हुई लाश पर पड़ी. जल्दी से बच्ची को हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टर ने उसे मरा हुआ घोषित कर दिया. मेडिकल बोर्ड की ओर से बताया कि बच्ची की हत्या की गई है. वो भी गला रेतकर.

घटनास्थल का मुआयना करती पुलिस.
इसके बाद मामला पहुंचा पुलिस के पास. पुलिस ने नवाब से सवाल-जवाब शुरू किया तो उसका कहना था कि वो शॉक में हैं. हालांकि सख्ती पर वो टूट गया और अपना गुनाह कुबूल लिया. बताया कि उस पर किसी शैतान का साया आ गया था, जिसकी वजह से उसने अपनी बेटी की ही हत्या कर दी. उसका कहना है कि इस हत्या का जिम्मेदार शैतान है, वो नहीं. खैर, नवाब चाहे कुछ भी कह लें, असल शैतान वही हैं. इन जैसे लोगों की वजह से ही कोई धर्म बदनाम होता है. जो लोग कहते रहते हैं कि इस्लाम खतरे में है, उन्हें समझना चाहिए ऐसे तत्वों की वजह से ही कोई धर्म खतरे में आता है.
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