पेशे से मूर्तिकार मुक्तिकांत का ये सफर 2018 के अप्रैल महीने में शुरू हुआ था. अब तक उन्होंने 1350 किलोमीटर का फासला तय कर लिया है. चलते-चलते जब वो थक गए तो उत्तर प्रदेश में के किसी हाईवे पर बेहोश होकर गिर गए. इसके बाद उन्हें आगरा के एक अस्पताल में भर्ती करवाया गया है. न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मुक्तिकांत ने बताया-
2015 में जब प्रधानमंत्री मोदी जी ने मेरे गांव के लोगों से बेहतर मेडिकल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर का वादा किया, तब से हमारे लोग इसका इंतज़ार कर रहे हैं. लेकिन इतने दिनों बाद भी कुछ बेहतर नहीं हुआ. मैं प्रधानमंत्री जी से मिलकर उन्हें रिक्वेस्ट करना चाहता हूं कि वो अपना किया वादा पूरा करें. वो राउरकेला के ब्राह्मणी पुल का काम पूरा करवाएं. इस्पत जनरल हॉस्पिटल को सुपर स्पेशैलिटी हॉस्पिटल में अपग्रेड करवाएं. जैसा उन्होंने वादा किया था.

अपनी पैदल यात्रा के दौरान मुक्तिकांत आगरा के आसपास हाईवे पर गिरकर बेहोश हो गए थे.
देश में बहुत सारे लोगों को बेसिक मेडिकल सुविधा नहीं मिलती. लोगों की इसी समस्या ने मुक्तिकांत को घर से निकलने के लिए मजबूर कर दिया. जब उनसे पूछा गया कि क्या चीज़ उन्हें लगातार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है. इस पर उनका जवाब था, 'अपने देश का तिरंगा झंडा'. घर से निकलते समय जरूरी चीज़ों की लिस्ट में तिरंगा सबसे ऊपर था. वो इस पूरे सफर में तिरंगा अपने साथ लेकर घूम रहे हैं. बेहोश होने की वजह से उन्हें रुकना पड़ा वरना वो दिल्ली पहुंचकर ही रुकते. मुक्तिकांत का कहना है, वो जैसे ही ठीक होंगे अपनी यात्रा वापस शुरू कर देंगे.

मुक्तिकांत बिस्वाल ओडिशा के राउलकेला से आते हैं.
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