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JNU बवाल से नाराज 3 ABVP लीडर्स का इस्तीफा

फेसबुक पर लिखा, ' गुंडागर्दी और देशभक्ति में फर्क होता है. सरकार जो कर रही है, हम उससे खुश नहीं.'

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Source: Reuters
JNU मामले में एक कड़ी और जुड़ गई है. तीन ABVP लीडर्स ने इस्तीफा दे दिया है. बुधवार को रिजाइन करते हुए उन्होंने कहा कि कॉलेज के साथ जो हो रहा वो ठीक नहीं है. देशद्रोही नारे लगाने वालों को कानून के हिसाब से सजा मिले. लेकिन अभी जिस तरह की कार्यवाही सरकार कर रही है, हम उसके साथ खड़े नहीं हो सकते. अपनी फेसबुक पोस्ट में ABVP लीडर प्रदीप नरवाल ने लिखा कि  झंडे लेकर देश के नाम पर गुंडागर्दी करने वाले जान लें कि देशभक्ति और उपद्रव में फर्क होता है. JNU को बंद कराने वालों को पहले उस चैनल को बंद कराना चाहिए जिसने JNU का नाम खराब किया और पूरे कॉलेज को देशद्रोही घोषित कर दिया. प्रदीप नरवाल ने अपना इस्तीफा और उसकेआगे की बात फेसबुक पर लिखी है. पढ़ लीजिए.

मैं प्रदीप ज्वाइंट सेक्रेट्री ABVP JNU यूनिट, राहुल यादव प्रेसिडेंट SSS ABVP यूनिट, और अंकित हंस सेक्रेट्री SSS ABVP यूनिट. हम ABVP से इस्तीफा दे रहे हैं और अपने विचार अलग होने के कारण हम इन गतिविधियों में ABVP के साथ नहीं हैं. वजहें ये हैं: 1. ताजा JNU मामला 2. पार्टी से मनुस्मृति और रोहित वेमुला केस में लंबा वैचारिक मतभेद.

9 फरवरी को कैंपस में जो देश विरोधी नारे लगे वो दुर्भाग्यपूर्ण थे. जो जिम्मेदार हैं उनको कानून के दायरे में सजा मिलनी चाहिए. लेकिन मौजूदा NDA सरकार जिस तरह से इस पूरे मामले को हैंडल कर रही है, प्रोफेसरों का उत्पीड़न हो रहा है, कोर्ट परिसर में मीडिया और कन्हैया कुमार पर बार बार वकीलों का हमला, ये सब पूरी तरह से गलत है. हमारा मानना है कि जांच के नाम पर पूरी विचारधारा का नाश किया जा रहा है और पूरी लेफ्ट विचारधारा को देशद्रोही बना कर पेश किया जा रहा है.

लोग #SHUTDOWNJNU के मैसेज फैला रहे हैं, जबकि उनको #SHUTDOWNZEENEWS चलाना चाहिए. जी न्यूज बायस्ड मीडिया ग्रुप जिसने इस वर्ल्ड क्लास कॉलेज का नाम खराब किया और कुछ लोगों के गलत काम को पूरी JNU की स्टूडेंट कमेटी से जोड़ दिया. JNU प्रगतिशील और डेमोक्रेटिक इंस्टीट्यूट है जहां हम समाज के लोअर क्लास से अपर क्लास तक का खुलापन देख सकते हैं, बराबरी की भावना देख सकते हैं. हम ऐसी सरकार का माउथपीस नहीं बन सकते, जिसने छात्रों का उत्पीड़न किया, जिसमें ओपी शर्मा जैसे विधायक हैं. या जिन्होंने दक्षिणपंथी फासिस्ट विचारधारा को थोपने के लिए JNU के गेट पर या पटियाला हाउस कोर्ट में कानून हाथ में लिया. हम रोज गेट पर लोगों को झंडे लिए खड़े देखते हैं. JNU स्टूडेंट्स को पीटने के लिए. ये गुंडागर्दी है देशभक्ति नहीं. आप देश के नाम पर कुछ भी नहीं कर सकते, देशभक्ति और गुंडागर्दी में फर्क है.

देश विरोधी नारे कहीं भी बर्दाश्त नहीं किए जाने चाहिए, कैंपस में या देश के किसी भी हिस्से में. JNUSU और कुछ लेफ्ट ऑर्गनाइजेशंस का कहना है कि कैंपस में कुछ नहीं हुआ लेकिन जो इवेंट ऑर्गनाइज किया गया जिसमें DSU के लोगों ने भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगाए, जिसके वीडियो में सुबूत हैं, उन छिपे हुए लोगों को बाहर लाया जाए. हम मांग करते हैं कि नारे लगाने वाले लोगों में जो भी लोग शामिल हैं उनको कानून के मुताबिक सजा मिले. लेकिन इसका मीडिया ट्रायल बंद होना चाहिए. जिसकी वजह से पूरे देश में एंटी JNU माहौल बन रहा है. हम लोगों को JNU बचाने के लिए खड़ा होना है जिसने हमको पहचान दी, हमको पार्टी लाइन से हटकर JNU के स्टूडेंट्स का फ्यूचर बचाना है जिनमें 80 परसेंट स्टूडेंट्स का किसी पॉलिटिकल पार्टी से कोई संबंध नहीं है. आओ मिलकर JNU का कल्चर बचाएं. वंदे मातरम जय भीम।। जय भारत।

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